(राज किशन जी की चढ़ती कला की गायकी)जो कहदी थी रंग महल में-राजकिशन, दादा लख्मीचंद की, भगत पूर्णमल,

(राज किशन जी की चढ़ती कला की गायकी)जो कहदी थी रंग महल में-राजकिशन, दादा लख्मीचंद की, भगत पूर्णमल,

सभी रागनी प्रेमियों को नमस्कार हरेक प्रस्तुति में आपको कुछ अलग देखने को मिलेगा। ( पुराना दंगली प्रोग्राम) ‌‌ किस्सा----- भगत पूरणमल कवि--- पंडित दादा लख्मीचंद जाटी वाले रागनी------- जो कहदी थी रंग महल में वाहे सलाह मेरी सै। पूर्णमल तने नजर मेहर की कदकी कद फैरी सै।। गायक----- राजकिशन अगवानपुरिया व साथी प्रस्तुतकर्ता------- बैनीवाल