सभी रानी प्रेमियों को हाथ जोड़ कर नमस्कार 🙏 आप सभी के सामने पेश है स्टेज प्रोग्राम की एक रागनी-------- थल जंगल बण खंड भंवर मै डोल नांव हमारी। हो परदेसी पिया याद सतावे थारी-हो थारी ।। किस्सा:------------ सेठ ताराचंद कवि:---- पंडित दादा लख्मीचंद जी जाटी वाले गायक:--- राजकिशन अगवानपुरिया व साथी प्रस्तुतकर्ता:-------- बैनीवाल