हे पद्मावत मानें ते कह दयूं.  पं. लख्मीचंद की ये रागनी बहुत कम सुनी होगी

हे पद्मावत मानें ते कह दयूं. पं. लख्मीचंद की ये रागनी बहुत कम सुनी होगी

ये रागनी कैसी लगी, अपनी राय जरूर देना.