DB LIVE | 3 feb 2017| Today's History

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1934 में पहली बार हवाई जहाज से पार्सल भेजने का सिलसिला शुरू हुआ था। लुफ्थांसा नाम की कंपनी ने इस सेवा की शुरुआत की थी। दरअसल जर्मनी उस वक्त चाहता था कि इस नई सर्विस के जरिए दक्षिण अमेरिका में नए बाजार की खोज कर सके। बर्लिन से पहले हाइंकेल हे नाम के विमान से 70 किलो चिट्ठियां और पार्सल श्टुटगार्ट लाए गए। फिर वहां से उन्हें फ्रांसीसी शहर मार्से से होते हुए स्पेन के सेविया पहुंचाया गया, जिसके बाद गैंबिया से निकलने के बाद विमान को गुलेल की तरह जहाज से टेक ऑफ कराया गया। ब्राजील के नाटाल पहुंचकर वहां एक पानी में तैरने वाले हवाई जहाज ने पार्सल संभाले और उन्हें ब्राजीली शहर रियो डे जानेरो और बुएनोस आयरेस तक पहुंचाया। इस पूरी प्रक्रिया में छह दिन लगे। एयरमेल के पहले साल में कंपनी ने 5,000 किलो से ज्यादा सामान पहुंचाया, लेकिन इसमें 47 विमानों को काम पर लगाना पड़ा। 1963 में भारतीय रिज़र्व बैंक के 23वें गवर्नर रघुराम राजन का जन्म हुआ था। रघुराम राजन पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह के प्रमुख आर्थिक सलाहकार रहे और शिकागो विश्वविद्यालय के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर थे। राजन शुरुआत से ही पढ़ाई में होशियार थे। दिल्ली के इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में उन्हें डायरेक्टर्स गोल्ड मैडल और अहमदाबाद के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ था। 2003 से 2006 के बीच वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख अर्थशास्त्री और अनुसंधान निदेशक रहे। उन्होंने योजना आयोग द्वारा नियुक्त वित्तीय सुधार समिति का नेतृत्व भी किया। 2010 में उन्होंने ‘फाल्ट लाइन्स: हाउ हिडन फ्रैक्चर्स स्टिल थ्रैटन द वर्ल्ड इकॉनमी’ लिखी जिसके लिए उन्हें साल 2010 का ‘फाइनेंसियल टाइम्स-गोलमैन सैक्स’ ‘बेस्ट बिज़नेस बुक’ पुरस्कार दिया गया। 1966 में रूस ने चांद पर पहली बार एक अंतरिक्ष यान नियंत्रित ढंग से उतारा था। लूना-9 मॉस्को समय के हिसाब से रात पौने दस बजे चांद पर उतरा था। उसके बाद यान पर लगे उपकरणों ने तुरंत ही आस-पास के चित्र लेने शुरू कर दिए। चांद पर इस यान के उतरने के बाद अमेरिकी यान की ओर से भेजी गई उन तस्वीरों की पुष्टि होती है, जिसके अनुसार चांद की सतह सख़्त है और जैसा कुछ खगोल शास्त्री सोचते थे कि वहां पर धूल की एक सतह होगी ऐसा नहीं है। इस बात का सबूत मिलने के बाद कि चांद पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री वहां किसी दलदल में नहीं धंस जाएंगे, अब चांद पर पहला मानव भेजने की होड़ और तेज़ हो जाएगी। टेलीविज़न पर एक सोवियत वैज्ञानिक ने बताया कि जहां पर लूना-9 यान उतरा था, वहां चांद की सतह काफ़ी पथरीली थी। 1986 में पोप जॉन पॉल द्वितीय और मदर टेरेसा की कोलकाता में मुलाक़ात हुई, जिसके बाद पोप ने मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटीज़ के अस्पताल में बीमारों को खाना खिलाया था। पोप शहर की झुग्गी बस्ती के बीच में बनी दो मंज़िला इमारत के पास पहुंचे, तो मदर टेरेसा ने उनके हाथों को चूमा और फिर 1950 में स्थापित 'निर्मल हृदय' नाम वाले घर में ले गईं। इस इमारत में कैंसर, टीबी और कुपोषण का शिकार बच्चों का इलाज हो रहा था। पोप ने वहां पर कई बीमारों को चूमा और उन्हें गले लगाकर प्रार्थना करते हुए ईश्वर से कहा कि वह उन 'लोगों को आशीर्वाद दें जो शीघ्र ही उनके पास आने वाले हैं।' 2000 में भारत के मशहूर तबला वादक अल्ला रक्खा ख़ां का निधन हुआ था। खां साहब को भारत के सर्वश्रेष्ठ एकल और संगीत वादकों में से एक माना जाता था। बचपन से ही अल्ला रक्खा को तबले की आवाज खींचा करती थी। 12 साल की उम्र में तबला सीखने के लिए उन्होंने घर छोड़ दिया। 1945 से 1948 के बीच सिनेमा जगत में भी उन्होंने अपनी किस्मत आज़मायी, लेकिन दो-तीन फ़िल्मों के लिए संगीत देने के बाद उनका मन इस मायाजाल से हट गया। अल्ला रक्खा सधे हुए हाथों से जब तबले पर थाप मारते थे, तो श्रोता भाव विभोर हो जाते थे। संगीत के क्षेत्र में अल्ला रक्खा के अद्भुत योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया।