1882 में भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले वीर क्रांतिकारियों में से एक विजय सिंह पथिक का जन्म हुआ था। विजय सिंह पर अपनी मां और परिवार की क्रान्तिकारी और देशभक्ति से परिपूर्ण पृष्ठभूमि का बहुत गहरा असर पड़ा था। विजय सिंह पथिक अपनी युवावस्था में ही रासबिहारी बोस और शचीन्द्रनाथ सान्याल जैसे अमर क्रान्तिकारियों के सम्पर्क में आ गए थे। वैसे विजय सिंह पथिक जी का असली नाम 'भूपसिंह' था, लेकिन 'लाहौर षड़यंत्र' के बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर विजय सिंह पथिक रख लिया और फिर अपने जीवन के अंत समय तक वह इसी नाम से जाने जाते रहे। पथिक ने 'बिजोलिया किसान आन्दोलन' के नाम से किसानों में स्वतंत्रता के प्रति आग जगाने का काम शुरु कर दिया था। 1920 में पथिक जी के कोशिशों से अजमेर में 'राजस्थान सेवा संघ' की स्थापना हुई थी। 1999 में नाइजीरिया में 15 साल में पहली बार असैन्य शासक चुनने के लिए मतदान हुआ था। इस दिन भारी मात्रा में मतदान केंद्रों पर लोग अपना मत डालने पहुंचे। पूर्व सैन्य शासक ऑल्युसेगन ऑब्सान्जो ने 1979 से नाइजीरिया की सत्ता संभाल रखी थी। इस मतदान पर पश्चिमी देशों की भी नज़र टिकी हुई थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने कहा कि मतदान प्रतिशत काफ़ी अच्छी रहा। पूर्व सैन्य शासक ऑल्युसेगन ऑब्सान्जो ने पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव लड़ा और बहुमत हासिल किया। राष्ट्रपति की गद्दी संभालने के बाद उन्होंने सैन्य शासन के दौरान हुए मानवाधिकार हनन के मामलों को उठाया और राजनीतिक बंदियों को क़ैद से छुड़वाया। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार पर भी नकेल कसनी शुरू कर दी। लेकिन बाद में उनके आलोचकों ने उन पर धांधली के आरोप लगाए जिसके बाद 2002 में उन पर महाभियोग चलने की बातें होने लगीं। लेकिन 2003 में हुए चुनावों में उन्होंने एक बार फिर भारी मत से जीत हासिल की। 2002 में गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगाए जाने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी। आग तब लगी जब अहमदाबाद को जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन से गुज़रने वाली थी। इस ट्रेन में यात्रा कर रहे तीर्थयात्री अयोध्या से लौट रहे थे। आरोप है कि मुसलमानों के एक गुट ने कथित तौर पर ट्रेन में आग लगाई थी। इस हादसे के बाद गुजरात में सांप्रदायिक तनाव फैल गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जनता से शांति की अपील की। गोधरा में सभी स्कूल और दुकानें बंद करवा दी गईं और कर्फ़्यू लगा दिया गया। विश्व हिंदू परिषद ने इस हमले का बदला लेने के लिए पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किए, जिसके बाद हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे शुरू हो गए। इन दंगों में कम से कम 1,000 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज़्यादातर मुसलमान थे। 2010 में क्यूबा में साम्यवादी सरकार विरोधी चार क़ैदियों और एक भूतपूर्व राजनीतिक बंदी ने नागरिक संघर्षकर्ता ओरलांडो ज़पाटा तामायो की मौत के विरोध में भूख हड़ताल शुरु की थी। क्यूबा की सरकार ने भूख हड़ताल से मारे जाने वाले नागरिक संघर्षकर्ता के मामले में अपना बचाव किया। क़ैदी ओरलांडो ज़पाटा तामायो 50 दिनों से भूख हड़ताल पर थे ,जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। अधिकारियों का कहना था कि ओरलांडो ज़पाटा तामायो को एक सप्ताह पहले ही जेल से अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। दरअसल ओरलांडो ज़पाटा तामायो को क्यूबा सूबे में हुए एक सरकार विरोधी प्रर्दशन के बाद गिरफ़्तार किया गया था। हालांकि बाद में अन्य लोगों को जल्द ही रिहा कर दिया गया, ज़पाटा तामायो पर मुक़दमा चलाया गया और उन्हें पहले किए गए एक जुर्म के आधार पर जेल में डाल दिया गया। उन्हें चार साल की सज़ा सुनाई गई थी, जिसके विरोध में उन्होंने हड़ताल की थी। अमेरिका ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि ओरलांडो ज़पाटा तामायो की मौत बेवजह हुई और यह इस बात का सबूत है कि क्यूबा की जनता का दमन जारी है।