DB LIVE | 18 FEB 2017 | TODAY'S HISTORY

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1405 में तैमूर लंग का निधन हुआ था। उन्होंने महान तैमूरी राजवंश की स्थापना की थी। तैमूर 1369 ई. में समरकंद के अमीर के रूप में अपने पिता के सिंहासन पर बैठे और इसके बाद विश्व-विजय के लिए निकल पड़े। मेसोपोटामिया, फ़ारस और अफ़ग़ानिस्तान पर फतह कर 1398 में अपनी विशाल अश्व सेना के साथ उन्होंने भारत पर आक्रमण किया। तैमूर ने दिल्ली के नज़दीक सुल्तान महमूद तुग़लक़ की विशाल सेना को निर्णायक रूप से परास्त कर दिल्ली के अंदर प्रवेश किया। दिल्ली में वह केवल 15 दिन रुके, फिर लूट का माल लादकर अपने वतन वापस लौट गए। भारत से जो कारीगर वह अपने साथ ले गए, उनसे उन्होंने समरकंद में अनेक इमारतें बनवाईं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध उनकी स्वनियोजित मस्जिद है। 1836 में भारत के महान संत, विचारक और स्वामी विवेकानन्द के गुरु रामकृष्ण परमहंस का जन्म हुआ था। परमहंस ने सभी धर्मों की एकता पर ज़ोर दिया था। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। ईश्वर की प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति का जीवन बिताया। रामकृष्ण मानवता के पुजारी थे। साधना के फलस्वरूप वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि संसार के सभी धर्म सच्चे हैं और उनमें कोई भिन्नता नहीं है। वे ईश्वर तक पहुंचने के भिन्न-भिन्न साधन मात्र हैं। परमहंस के विचारों से प्रभावित होकर स्वामी विवेकानंद ने उन्हें अपना गुरु माना और उनके विचारों को गति देने के लिए रामकृष्ण मठ की स्थापना की। 1930 में अमेरिका में एरिजोना की लोवेल ऑब्जरवेटरी में खगोलशास्त्री क्लाइड डब्ल्यू टॉमबॉ ने प्लूटो ग्रह की खोज की थी। हालांकि प्लूटो के होने की संभावना सबसे पहले वैज्ञानिक पर्सियल लोवेल ने जताई थी। उनका कहना था कि सौरमंडल में यूरेनस और नेप्च्यून के बीच डगमगाहट एक अज्ञात ग्रह के गुरुत्वाकर्षण से होती है। उन्होंने इस सिलसिले में एक दशक से ज्यादा रिसर्च की, लेकिन कामयाब नहीं हुए। 1929 में उनके आंकड़ों की मदद से इस ग्रह की स्थिति का अनुमान लगाया गया। खगोलशास्त्री टॉमबॉ की इस खोज की कई अन्य वैज्ञानिकों ने पुष्टि भी की। लेकिन 2006 में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीन लिया। इसकी वजह एक नया नियम था, जिसके तहत "किसी भी ग्रह की कक्षा दूसरे ग्रह की कक्षा से होकर नहीं गुजरनी चाहिए।" और प्लूटो की कक्षा नेप्च्यून की कक्षा को काट रही थी। 1996 में लंदन के वेस्ट एन्ड इलाक़े में एक डबल-डेकर बस में धमाका हुआ था। इस धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई और आठ लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। धमाका तब हुआ जब बस रक्षा मंत्रालय की इमारत के पास से गुज़र रही थी। धमाका इतना ज़ोरदार था कि उसकी आवाज़ आठ किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की ख़बरें आईं थीं। स्कॉटलैंड यार्ड के मुताबिक़ हमला रात पौने ग्यारह बजे हुआ, जिसके बाद आसपास के मेट्रो स्टेशन और सड़क के कई रास्ते बंद कर दिए गए। धमाके से कुछ ही दिन पहले आइरिश रिपब्लिकन आर्मी ने अपना संघर्ष-विराम ख़त्म करते हुए लंदन के डॉकलैन्ड्स इलाक़े में बम धमाका किया था, जिसमें दो लोग मारे गए थे। बस में हमले की घटना की तहक़ीक़ात में आईआरए के एक हमलावर का ही हाथ पाया गया था। 2007 में दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस में बम धमाके हुए थे, जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई थी। धमाके की वजह से ट्रेन की दो बोगियां बुरी तरह से जल गईं थीं। मरने वालों में ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल थे। ट्रेन पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना हुई और क़रीब एक घंटे के बाद ही हरियाणा के पानीपत से दस किलोमीटर पहले सिवाह गांव में यह हादसा हुआ। भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते के तहत जून, 1976 से समझौता एक्सप्रेस चलनी शुरू हुई थी। शुरुआत में समझौता एक्सप्रेस अमृतसर और लाहौर के बीच चला करती थी। बाद में सुरक्षा कारणों की वजह से व्यवस्था बदली गई और मई, 1994 से यह दिल्ली से अटारी और अटारी से लाहौर के बीच दो हफ्ते में एक बार चलने लगी।