बाग जनाना हुकम नहीँ सै. पाले राम व साथियों की गाई हुई अलग साज पर एक बहुत दुर्लभ प्रस्तुती

बाग जनाना हुकम नहीँ सै. पाले राम व साथियों की गाई हुई अलग साज पर एक बहुत दुर्लभ प्रस्तुती

ऐसा साजबाज ओर ऐसा गाने का अंदाज ढूँढे से भी नहीं मिलेगा । पुरानी गायकी का अंदाज ही कुछ निराला था.साथियो, मेरे विचारों से आप कितने सहमत हैं जरूर बताना