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गोकल् गढ़ तै री वा चाली गुजरिया . मास्टर जी के शिष्य ओमप्रकाश का गाया बहुत अच्छा भजन
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गोकल् गढ़ तै री वा चाली गुजरिया . मास्टर जी के शिष्य ओमप्रकाश का गाया बहुत अच्छा भजन
बीर सुपात्र ब्याही जा ते सब तरिया घर भरज्या रै. गायक: मास्टर महाबीर चोपड़ा
बेशर्मी छागी सारे कै बिगड्या सबका दीन किस पै करूँ रै यकीन. गायक:- स्व. राजकिशन त्यागी जी
बेशरमी छागी सारे कै, यो बिगड्या सबका दीन. जगबीर कारोरिया की गायकी का कोई मुकाबला ही नहीं था
सत् की डोरी मन कपटी पै , गायक:मा.महाबीर चोपड़ा
गोपी चंद हुया त्यार न्हाण नै. जगबीर कारोरिया की गाई हुई एक और पसंदीदा रागनी
हरि हरि बोल हरि गुण गा ले. मोहन बड़वासनी वाले का गाया हुआ एक प्यारा सा भजन
बीर मर्द हम दो बालक सै, भूखे और तिसाये. सत्ते की आवाज में सरवर नीर की बहुत अच्छी रागनी
ये तारीख दिन और रात सुहानी. बुढ़ापे में भी जिले बाबा की आवाज बहुत दमदार थी
ब्याह तै हो सै बन्ना बन्नी का. मास्टर जी की आवाज में ब्याह के समय का चाव और उमंग,
कहन् लग्या रानी ते खोटी दुःशासन बलवान. गायक: सत्ते फरमानिया
बेवारिस् की ढाल फिरै! जगबीर कारोरिया की आवाज मे जानी चोर के किस्से की एक बहुत अच्छी रागनी
पाहयां कै म्हा लेट गई.पाले राम की पुराने समय की गाई हुई एक बहुत सुन्दर रचना
"The trick of this colourful era has been revealed."
परवाना छाती कै ला लिया, जिसमें भेद लिख्या अनमोला. मास्टर जी की शहद से भी मीठी गायकी
कितके लाल ख़िलावे राणी, दासी हो ज्यागी. मास्टर जी की गाई इस रागनी को बार बार सुनोगे
तला जनाने न्यारे आली, साहूकार गुजारे आली. मास्टर जी की ये गायकी हमेशा याद आती रहेगी
तेरी बहाण का जाया सू. स्व.पं.जगन्नाथ जी की 38 साल पहले गाई हुई रागनी
जड़ चेतन में व्यापक हो कै निज पै वास करै सै. गायक: स्व. श्री बलबीर सिंह गान्धरा वाले
टिब्या पर कै टूबल लागे किसी जगाजोत् होरी ( गायक सत्तु रोहणा)