विद्येश्वर संहिता अध्याय 3 II श्री शिव महापुराण II  #puranas #mahadev #shiva # #mahakal #shivpuran

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तीसरा अध्याय मुख्य रूप से साधना के तीन प्रमुख अंगों - श्रवण, कीर्तन और मनन के महत्व और विधि पर केंद्रित है, जिसमें भगवान शिव की प्राप्ति के लिए गुरु से सुनकर (श्रवण), उनके गुणों का स्मरण कर (कीर्तन), और निरंतर चिंतन (मनन) करने का उपदेश दिया गया है, जिससे लौकिक आनंद और शिव का सान्निध्य प्राप्त होता है, खासकर लिंग पूजा और प्रणव मंत्र (ॐ) के महत्व पर बल दिया गया है। अध्याय 3 के मुख्य बिंदु: साधना के साधन: भगवान शिव की प्राप्ति के लिए श्रवण, कीर्तन और मनन (चिंतन) को प्रमुख साधन बताया गया है, जिसमें गुरु मुख से सुनना सबसे पहला और महत्वपूर्ण है। मनन का अर्थ: शिव के नाम, रूप, गुण और लीलाओं का निरंतर हृदय में चिंतन करना ही मनन है, जो महेश्वर (शिव) की कृपा से ही संभव है। लिंग पूजा का महत्व: यह अध्याय शिवलिंग और मूर्ति दोनों के पूजन को बताता है, लेकिन लिंग पूजा को श्रेष्ठ और ऊंचा स्थान देता है, क्योंकि शिव ने स्वयं स्तंभ रूप में प्रकट होकर विश्व का संरक्षण किया था (ब्रह्मा-विष्णु के युद्ध के प्रसंग में)। प्रणव मंत्र (ॐ): शिव के प्रणव लिंग और प्रणव मंत्र के जप का महत्व बताया गया है, जो विशेष फलदायी होता है। पूजा का समय और विधि: आर्द्रा नक्षत्र और चतुर्दशी तिथि को पूजन, होम और तर्पण के लिए शुभ बताया गया है, और शिवलिंग के पूजन से शिवपद की प्राप्ति सुलभ होती है। संक्षेप में, विद्येश्वर संहिता का तीसरा अध्याय साधक को शिव-प्राप्ति के लिए श्रवण, कीर्तन और मनन के मार्ग पर चलने, विशेषकर शिवलिंग और ॐ मंत्र के पूजन पर ध्यान केंद्रित करने का मार्गदर्शन करता है। #ytshorts #mahadevstatus #omnamahshivaya #mahadev #harharmahadev #music #yt #song #bholenath #sanatandharma #hindu #hinduism #explore #viral #trending #shorts #spiritualjourney #bhakti #devotional #shivstory #shivkatha #hinduscriptures #shivmahapuran