शिव महापुराण की विद्येश्वर संहिता का पहला अध्याय प्रयागराज में ऋषियों द्वारा सूतजी से कलियुग के पापों से मुक्ति और पार्थिव शिवलिंग पूजन की विधि तथा शिव भक्ति के महत्व के बारे में प्रश्न पूछने से शुरू होता है, जिसमें बताया गया है कि कलियुग में मनुष्य कैसे पतित हो जाएँगे और भगवान शिव की कृपा पाने का क्या उपाय है. सूतजी उन्हें बताते हैं कि भगवान शिव की भक्ति, खासकर शिवलिंग (पार्थिव शिवलिंग) का पूजन, ही इस कलियुग में मोक्ष और सुख का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है, जो करोड़ों यज्ञों के फल के बराबर है. अध्याय 1 का सार: प्रसंग: प्रयागराज के संगम पर सूतजी अन्य ऋषियों (जैसे शौनक, व्यास) से मिलते हैं. कलियुग के आने वाले पापों और धर्म के पतन से चिंतित होकर ऋषिगण सूतजी से तुरंत पापों का नाश करने वाला कोई उपाय पूछते हैं. ऋषियों की चिंता: वे बताते हैं कि कलियुग में मनुष्य अधर्मी, नास्तिक, व्यभिचारी, स्वार्थी हो जाएँगे और वर्ण-व्यवस्था भी नष्ट हो जाएगी, जिससे उनका कल्याण कैसे होगा. भगवान शिव का वर्णन: भगवान शिव को सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान और सृष्टि के कारण रूप में वर्णित किया गया है. ब्रह्मा और विष्णु भी उनकी स्तुति करते हैं. शिवलिंग पूजा का महत्व: भगवान शिव उन्हें उपदेश देते हैं कि कलियुग में पार्थिव शिवलिंग (मिट्टी के शिवलिंग) का पूजन ही सबसे श्रेष्ठ है. यह पूजा भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करती है. विधि और फल: सूतजी बताते हैं कि शिवलिंग की स्थापना, पूजन और मंत्र जप से मनुष्य शिवत्व को प्राप्त कर सकता है. विशेषकर आर्द्रा नक्षत्र और चतुर्दशी तिथि में पूजन का विशेष फल मिलता है. निष्कर्ष: इस अध्याय में शिव पूजा, विशेषकर पार्थिव शिवलिंग की पूजा को कलियुग में मुक्ति और कल्याण का प्रमुख साधन बताया गया है. #ytshorts #mahadevstatus #omnamahshivaya #mahadev #harharmahadev #music #yt #song #bholenath #sanatandharma #hindu #hinduism #explore #viral #trending #shorts #spiritualjourney #bhakti #devotional #shivstory #shivkatha #hinduscriptures #shivmahapuran