Kalsarpa Dosha - काल शर्प दोष क्या है ...? कालसर्प दोष का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय उत्पन्न होने लगता है। लोगों के बीच में ऐसी धारणा बन चुकी है कि कालसर्प दोष सदैव कष्टकारी ही होता है। लेकिन ये सच नहीं है। जन्म-कुंडली में विविध लग्नों व राशियों में स्थित ग्रह के भाव के आधार पर ही इस योग के अच्छे या बुरा होने का पता चलता है। कई लोगों के लिए काल सर्प योग वरदान साबित होता है। कैसे बनता है काल सर्प दोष? जब कुंडली में राहु और केतु एक तरफ मौजूद होते हैं और बाकी सभी ग्रह इनके बीच में हों स्थित हों तब कालसर्प योग या दोष बनता है। ऐसा कहा जाता है कि जिनकी कुंडली में ऐसी स्थिति बनती है उन्हें जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन लोगों को सफलता पाने में देरी लगती है। काल सर्प योग 12 प्रकार के होते हैं जिनका अलग-अलग प्रभाव होता है। कई लोगों के जीवन में इस योग की वजह से अशांति मची रहती है काल सर्प योग के प्रकार: वासुकी कालसर्प योग- यदि कुंडली के तृतीय भाव में राहु एवं नवम भाव में केतु हो एवं इसके मध्य सारे ग्रह हों, तो यह योग बनता है, इस योग में भाई-बहन को कष्ट, पराक्रम में कमी, भाग्योदय में बाधा, नौकरी में कष्ट, विदेश प्रवास में कष्ट उठाने पड़ते हैं। 4- शंखपाल कालसर्प योग- यदि राहु नवम् में एवं केतु तृतीय में हो, तो यह योग बनता है, जातक भाग्यहीन हो अपमानित होता है, पिता का सुख नहीं मिलता एवं नौकरी में बार-बार निलंबित होता है। 5- पद्म कालसर्प योग- अगर पंचम भाव में राहु एवं एकादश में केतु हो तो यह योग बनता है, इस योग में संतान सुख का अभाव एवं वृद्धा अवस्था में दुखद होता है, शत्रु बहुत होते हैं, सट्टे में भारी हानि होती है। 6- महापद्म कालसर्प योग- यदि राहु छठें भाव में एवं केतु व्यय भाव में हो, तो यह योग बनता है इसमें पत्नी विरह, आय में कमी, चरित्र हनन का कष्ट भोगना पड़ता है। 7- तक्षक कालसर्प योग- यदि राहु सप्तम् में एवं केतु लग्न में हो तो यह योग बनता है, ऐसे जातक की पैतृक संपत्ति नष्ट होती है, पत्नी सुख नहीं मिलता, बार-बार जेल यात्र करनी पड़ती है। 8- कर्कोटक कालसर्प योग- यदि राहु अष्टम में एवं केतु धन भाव में हो, तो यह योग बनता है, इस योग में भाग्य को लेकर जातक को परेशानी होती है, नौकरी की संभावनाएं कम रहती है, व्यापार नहीं चलता, पैतृक संपत्ति नहीं मिलती और नाना प्रकार की बीमारियां घेर लेती है। 9- शंखचूड़ कालसर्प योग- यदि राहु सुख भाव में एवं केतु कर्म भाव में हो, तो यह योग बनता है, ऐसे जातक के व्यवसाय में उतार-चढ़ाव एवं स्वास्थ्य खराब रहता है। 10- घातक कालसर्प योग- यदि राहु दशम् एवं केतु सुख भाव में हो तो यह योग बनता है, ऐसे जातक संतान के रोग से परेशान रहते हैं, माता या पिता का वियोग होता है। 11- विषधर कालसर्प योग- यदि राहु लाभ में एवं केतु पुत्र भाव में हो तो यह योग बनता है, ऐसा जातक घर से दूर रहता है, भाईयों से विवाद रहता है, हृदय रोग होता है एवं शरीर जर्जर हो जाता है। 12- शेषनाग कालसर्प योग- यदि राहु व्यय में एवं केतु रोग में हो, तो यह योग बनता है, ऐसे जातक शत्रुओं से पीड़ित हो शरीर सुखित नहीं रहेगा, आंख खराब होगा एवं न्यायालय का चक्कर लगाता रहेगा। कालसर्प योग के लक्षण 1- जिसे कालसर्प दोष होगा उसे सपने में नदी, तालाब, कुएं, और समुद्र का पानी दिखाई देता है । 2- सपने में वह खुद को पानी में गिरते एवं उससे बाहर निकलने का प्रयास करते हुए देखता है । 3- उसे रात को उल्टा होकर सोने पर ही चैन की नींद आती है । 4- उसके सपने में मकान अथवा पेड़ों से फल आदि गिरते दिखाई देता है । 5- जिसे कालसर्प दोष होगा उसे पानी से और अधिक ऊंचाई से डर लगता है । 6- उसके मन में कोई अंजाना सा भय बना रहता है । 7- अक्सर वह सपने में खुद को दूसरे लोंगो से लड़ते झगड़ते हुए देखता है । 8- ऐसे लोंगो को बुरे व डरावने सपने आते है, एवं अक्सर साँप भी दिखाई देता है । 9- जिसे कालसर्प दोष होगा और यदि वह संतानहीन हो तो उसे किसी स्त्री के गोद में मृत बालक दिखाई देता है । 10- अक्सर उसे सपने में विधवा महिलायें दिखाई देती है । 11- उसे नींद में अपने शरीर पर साप रेंगता हुआ महसूस होता है । 12- श्रावन के महिने ऐसे लोगों का में मन हमेशा प्रसन्न रहता है कालसर्प दोष से मुक्ति का सबसे सरल उपाय, अपने घर में ही कर लें 1- हर रोज राहुकाल में 108 राहु यंत्रों को बहते जल में प्रवाहित करें। 2- किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर के मुख्य द्वार पर अष्टधातु या चांदी का स्वस्तिक लगाएं और उसके दोनों ओर धातु निर्मित नाग भी लगाएं। 3- किसी भी अमावस्या के दिन अपने पितरों को शांत व तृप्त कराने के लिए दान आदि करें। 4- कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए प्रतिदिन 7 बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी पर सिंदूर, चमेली का तेल व बताशा चढ़ाएं। 5- सोमवार को शिव मंदिर में चांदी के नाग की पूजा करें, पितरों का ध्यान करें एवं श्रध्दापूर्वक बहते हुए नदी के पानी में लोहे या तांबे से बने नाग विसर्जन करें। 6- जिन्हें कालसर्प दोष है वें, श्रावण मास में 30 दिनों तक भगवान महादेव का दही से अभिषेक करें। महामृत्युंजय कवच का नित्य पाठ करें एवं नव नाग स्तोत्र का भी पाठ करें । नवनाग स्तोत्र इस प्रकार से है : अनंत वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कंबल। शंखपालं धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा। एतानि नवनामानि नागानां च महात्मानां सायंकालेपठेन्नित्यं प्रातः काले विशेषतः ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्’’ महामृत्युंजय मंत्र: ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।