A pleasing Hindi Bhajan describing the divine beauty of Sri Ramachandra, by Sant Tulsidas. Learnt from HH Swami Purushottamanandaji of Ramakrishna Math. Taught as a musical lesson by Sri Vishwanath, Mentor, Sharada Gurkula, Bangalore. Student: Smt. Vanishree. Rag: Bilawal, Ektaal सीतापति रामचंद्र रघुपति रघुराई । भज ले अयोध्यानाथ दूसरा न कोई ।। रसना रस नाम लेत, संतन को दरस देत | ईषत मुखचंद्रबिंदु सुंदर सुखदाई ।। हसन बोलन चतुर चाल अयनवयन दृग बिसाल | भृकुटि कुटिल तिलकभाल नासिका सोहाई ।। केसरको तिलक भाल मानो रवि प्रातःकाल | मानो गिरिशिखर फोड़ी सुरसरि बहिरायी || मोतिनको कण्ठमाल तारागण उर विशाल | श्रवणकुण्डल झलमलात रतिपति छवि छाई || सखा सहित सरजु-तीर विहरे रघुबंश बीर | तुलसिदास हरष निरखि चरनरज पाई ।। तुलसिदास