एक ऐसा गांव जहां आप नहीं ले सकते हैं रामभक्त हनुमान का नाम, जानिए क्या हैं वज़ह

एक ऐसा गांव जहां आप नहीं ले सकते हैं रामभक्त हनुमान का नाम, जानिए क्या हैं वज़ह

एक ऐसा गांव जहां आप नहीं ले सकते हैं रामभक्त हनुमान का नाम, जानिए क्या हैं वज़ह जिस देश में हम हनुमान जी को संकटमोचन के नाम से पूजते हैं उसी देश में एक ऐसा गांव हैं जहां आप रामभक्त हनुमान का नाम लेना भी पाप हैं। अब आप यह सोच रहें होंगे कि आखिर वह कौन सा गांव हैं जहां हनुमान जी का नाम नहीं लिया जाता, जिन्होंने हमारी धरती को ऐसे कई दानवों से मुक्त कराया जो कि हम पर अत्याचार करते थे। मां सीता को खोजने में अहम योगदान हनुमान जी का ही हैं। संजीवनी बूटी के कारण लक्ष्मऩ का जीवित होना। अगर हनुमान नहीं होते तो रामायण जिसे हम पढ़ते हैं, वो अधूरा ही रह जाता। अब आइये हम आपको बताते है कि कौन हैं वो गांव ? आखिर क्या हैं इस संजीवनी बूटी का सच? उस गांव का नाम है द्रोणागिरी, जो मौजूद है द्रोण पर्वत पर। द्रोण पर्वत, यानी वही पहाड़, जिसका ज़िक्र रामायण में मिलता है। माना जाता है कि लक्ष्मण की जिंदगी बचाने के लिए हनुमान इसी पर्वत का एक हिस्सा लंका ले गए थे, और वहां के लोगों के कहना हैं कि हनुमान हमारी धरती से हमारा अमूल्य संपत्ति ले गए थे, जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था। इस क्षेत्र के लोग हनुमान जी को अपना दुश्मन मानते है। आपको बता दें कि द्रोण पर्वत से ठीक पहले एक जोशीमठ हैं जहां हनुमान जी की आखिरी मंदिर बनी हुई हैं। क्योंकि इस क्षेत्र से आगे न हनुमान की पूजा होती है और न हनुमान का ज़िक्र होता है। वैसे इस मंदिर की भी अपनी कहानी है। बता दें कि यह मंदिर औली के क्षेत्र में आता हैं, जिसके आगे द्रोण पर्वत की राह शुरू होती है। लेकिन जब औली में हनुमान जी को इतना माना जाता हैं तो यहां से 60 किलोमीटर दूर उन पहाड़ों में ऐसा क्या हो जाता है कि उनके भक्तों की एंट्री पर भी मनाही है? बता दें कि यह पर्वत उत्तराखंड में स्थित है।