प्रेमचंद युगीन हिंदी उपन्यास(1918  सेवासदन से 1936 गोदान तक)

प्रेमचंद युगीन हिंदी उपन्यास(1918 सेवासदन से 1936 गोदान तक)

प्रेमचंद युगीन हिंदी उपन्यास(1918 सेवासदन से 1936 गोदान तक)    • प्रेमचंद युगीन हिंदी उपन्यास(1918  सेवासदन...   प्रेमचंदयुगीन हिंदी उपन्यास - इस युग के उपन्यास लेखन में प्रेमचंद जी की भूमिका सबसे अहम रही है। उन्होंने सामाजिक यथार्थवाद एवं सामाजिक आदर्शवाद को अपने उपन्यासों का विषय बनाया। आरंभिक उपन्यासों में सामाजिक समस्या के समाधान को सुलझाने का प्रयास किया। आदर्शवादी ,आश्रमवादी , सदनवादी एवं हृदय परिवर्तन जैसे समाधानों की खोज की। दहेज प्रथा ,बेमेल विवाह, शोषण प्रदर्शनप्रियता ,जात पात, छुआछूत आदि से उत्पन्न होने वाली समस्याएं एवं उनके प्रभावों को उन्होंने बहुत गहराई से दिखाया । अपने उपन्यासों के अंतिम अपने उपन्यास लेखन के अंतिम पड़ाव में उन्होंने आदर्श की अपेक्षा यथार्थ चित्रण पर अधिक ध्यान दिया । बिना किसी लाग लपेट के समस्याओं को आदर्श का जामा पहनाए बिना, नग्न रूप में प्रस्तुत किया। प्रेमचंद जी के प्रमुख उपन्यासों की संक्षिप्त जानकारी - सेवासदन( 1918) विवाह की समस्याएं, दहेज प्रथा , पत्नी का स्थान, सम्मान आदि इस उपन्यास का प्रमुख विषय। निर्मला में दहेज प्रथा एवं अनमेल विवाह की समस्या को दिखाया गया है। प्रेमाश्रम (1922 ) किसान की समस्याओं एवं उस की दयनीय दशा को दिखाया गया है । रंगभूमि (1925 ) शासक वर्ग के अत्याचार। कायाकल्प (1926 ) में पुनर्जन्म के विषय को उठाया गया है। निर्मला (1927 ) दहेज एवं अनमेल विवाह। निर्मला से मनोवैज्ञानिक उपन्यासों की आंशिक शुरुआत मानी जाती है। इसमें किशोर मन की भावुकता एवं अधेड़ मन की भूख लिप्सा का यथार्थ पूर्ण चित्रण है। गबन( 1931) आभूषण प्रेम के दुष्परिणाम । कर्मभूमि (1933) स्वतन्त्रता संग्राम की झलक दिखाई गई है। मंगलसूत्र प्रेमचंद जी का यह उपन्यास अधूरा था । प्रेमचंद् युग के अन्य उपन्यासकारों में छायावादी कवि निराला एवं जयशंकर प्रसाद के उपन्यासों की भी अच्छी भूमिका रही। प्रसाद जी के दो उपन्यास - कंकाल (1929) व तितली (1934) में प्रकाशित हुए । इरावती इन का अधूरा उपन्यास था, जिसे वे अकाल मृत्यु के कारण पूरा नहीं कर पाए। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी के उपन्यासों में काव्यत्मकता का समावेश हुआ ।उन्होंने नारी समस्या का चित्रण किया है । अप्सरा (1931) अलका( 1931 ) निरुपमा, प्रभावती आदि उनके प्रमुख उपन्यास है। विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक के भिखारिनी, मां एवं संघर्ष प्रसिद्ध रहे । नारी ह्रदय की विशालता ,आदर्श प्रेम के साथ-साथ उन्होंने मां की ममता को भावुक रूप से प्रस्तुत किया। प्रताप नारायण श्रीवास्तव - विदा, विजय , विकास, विसर्जन, वेदना आदि। उनके आदर्शवादी परंपरा के उपन्यास हैं। बेकसी का मजार - उनका ऐतिहासिक उपन्यास है । अन्य सभी सामाजिक उपन्यासों की कोटि में आते हैं । बेचन शर्मा उग्र - इन के उपन्यासों में समाज के विभिन्न समस्याओं को उद्घाटित किया गया है । उन्होंने समाज की नीतियों , दुर्बलता का चित्रण अपने उपन्यासों में किया है। चंद हसीनों के खतूत , घंटा , शराबी , फागुन के दिन चार, जी जी जी , दिल्ली का दलाल , कड़ी में कोयला, सरकार तुम्हारी आंखों में, चॉकलेट , जुहू आदि प्रमुख हैं। उपेंद्रनाथ अश्क जी मध्यवर्गीय समाज के जीवन वृति स्वभाव विचार पद्धति पारिवारिक एवं सामाजिक बुराइयों को अपने उपन्यासों में चित्रित करते थे। उनके प्रमुख उपन्यास इस प्रकार हैं- सितारों के खेल 1940 , गिरती दीवारें 1947 , गरम राख 1957 , बड़ी-बड़ी आंखें 1955, पत्थरअल पत्थर 1957, शहर में घूमता आईना 1963, एक रात का नर्क (जो कि एक नदी कंदील का ही अंश है) 1968, एक नन्हीं कंदील 1959 , बांधो न नाव इस ठांव 1974, निमिषा 1980 , पलटती धारा 1997 ( क्योंकि इनके 1940 अर्थात गोदान के बाद के उपन्यास है, इसीलिए इन्हें प्रेमचंद युगीन उपन्यासकारों की अपेक्षा प्रेमचंदोत्तर उपन्यासकारों में स्थान दिया जाता है।) Hindi upanyas    • Upanyas (उपन्यास) पूरा अध्याय   इलाचंद्र जोशी घृणमयी (1929) संन्यासी (1941) पर्दे की रानी(1941) निर्वासित (1946) जिप्सी(1952) परख 1929, सुनीता 1935 , त्यागपत्र 1937 , कल्याणी 1939, सुखदा 1952, विवर्त 1953 , व्यतीत 1953 अज्ञेय जी के उपन्यास - शेखर एक जीवनी ( 1941) 2 भाग नदी के द्वीप 1951, अपने अपने अजनबी 1961 यशपाल - दादा कामरेड 1941 , देशद्रोही 1943, दिव्या 1946 , पार्टी कामरेड 1946, मनुष्य के रूप 1946 , अमिता 1956, 12 घंटे 1964 , झूठा सच 1960 Kripya channel ko like share and subscribe Jarur Karen.. चैनल का नाम है - हिंदी साहित्य और व्याकरण #HindisahityaaurvyakaranGuru नागार्जुन - रतिनाथ की चाची 1948 , बलचनामा 1952, नई पौध 1953, बाबा बटेसरनाथ 1954 , वरुण के बेटे 1957, दुखमोचन 1957 , कुंभीपाक 1960, हीरक जयंती 1961 , उग्रतारा 1963, गरीबदास 1979 भगवती चरण वर्मा - पतन 1927, चित्रलेखा 1934, 3 वर्ष 1936, टेढ़े मेढ़े रास्ते 1946, आखिरी दांव 1950, अपने खिलौने 1957, भूले बिसरे चित्र 1959, वह फिर नहीं आई 1960 , सामर्थ्य और सीमा 1962, थके पांव 1963 , रेखा 1964 , सीधी सच्ची बातें 1968, सबही नचावत राम गोसाई , धुप्पल1981 , चाणक्य 1982 अमृतलाल नागर - महाकाल 1946, बूंद और समुद्र 1956 , शतरंज के मोहरे 1959, सुहागपुर 1960, अमृत और विष 1966, मानस का हंस 1972, खंजन नयन 1981, नच्यो बहुत गोपाल 1978 , बिखरे तिनके 1982, अग्निगर्भा 1983, करवट 1985, पीढ़ियां 1990 आचार्य चतुरसेन शास्त्री - हृदय की परख 1918 , हृदय की प्यास 1931, अमर अभिलाषा 1933, वैशाली की नगरवधू 1948 , मंदिर की नर्तकी 1951, आलमगीर 1954, वयम रक्षाम: (1955), बिना चिराग का शहर 1960 पंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी - बाणभट्ट की आत्मकथा 1946, चारुचंद्र लेख 1963 , पुनर्नवा 1973 , अनामदास का पोथा 1976