पीथमपुर। धार जिले की औद्योगिक नगरी पीथमपुर सेक्टर 1 में आशिक पटेल के घर पर काम करने वाली युवती जो कि किरायेदारों से मात्र किराया वसूलने के लिए रखी गई थी आशिक पटेल एक तरफा उस युवती से प्यार करता था और आशिक पटेल व उसके पांच साथियों ने उस युवती के प्रेमी रुपेश का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और अपने ही घर के पीछे खजूर के पेड़ के नीचे दफना दिया और उसके ऊपर एक नीम का पौधा भी रोप दिया पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है वही इन्हें कल शाम को कोर्ट में पेश किया गया जहां से पुलिस को न्यायालय से आरोपी का पुलिस रिमांड स्वीकृत किया है । आपको बता दें कि मुख्य आरोपी आशिक पटेल अल्पसंख्यक मोर्चा तथा कामगार संघ से जुड़ा हुआ था कांग्रेस ने आरोपी को प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है इस मामले में आज अल सुबह से ही प्रशासन व पुलिस ने आशिक पटेल की अवैध सल्तनत को नेस्तनाबूद करने के लिए इंदौर से बुलवाई पोकलेन और आशिक पटेल की अवैध भवनों को नेस्तनाबूद किया जा रहा है और यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी जब तक कि उसका अवैध सल्तनत नेस्तनाबूद नहीं हो जाती । आशिक पटेल की सल्तनत को नेस्तनाबूद करने के लिए छह जेसीबी, दो बड़ी पोकलेन इंदौर से बुलवाई गई है । कल भी प्रशासन के द्वारा 10 से अधिक जेसीबी 3 डंपर 5 ट्रैक्टर ट्रॉली 200 से अधिक कर्मचारी लगाए गए थे और आज फिर प्रशासन के द्वारा पुलिस बल तैनात किया गया है अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती की गई है और आशिक पटेल के अवैध भवन ऑफिस व मकान को पोकलेन की सहायता से ध्वस्त किया जा रहा है आखिर ऐसे कितने आशिक पटेल पीथमपुर में जिनकी कि खेतो में व अवैध अतिक्रमण कर सस्ते दरों के कमरे बनाये गए है जिन पर प्रशासन ने अभी तक नजर नही डाली चूंकि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र है यहां पर काम करने वाला व्यक्ति फैक्ट्रियों में मजदूर होता है उसे 700 रुपये से लेकर हजार रुपए महीने में कमरा चाहिए होता है जो लीगल तरीके से बनाए हुए घरों का तो नहीं मिल सकता तो इस तरीके से खेतों में सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कर बकायदा चाल सिस्टम बना कर कमरे बनाए जाते हैं उन कमरों में मजदूर वर्ग के लोग 600 से 700 ,हजार रुपए महीना देकर इन घरों में रहते हैं और इन घरों के मालिक 5 लाख रुपये महीने की आमदनी कर लेते हैं इसके लिए बकायदा वसूली करने वाले कर्मचारी भी रखे जाते हैं जो कि इस हत्याकांड से मामला सामने आए हैं अब पुलिस व प्रशासन को चाहिए कि पीथमपुर व पीथमपुर के आसपास के क्षेत्रों में ऐसी कितने भवन है कितनी चाले हैं क्या उनकी परमिशन है शासकीय रिकॉर्ड में क्या दर्ज है खेंत ,डाइवर्टेड लेंड,आवासीय या कमर्शियल, रेवेन्यू इन भवनों से शासन को मिल रहा है या नहीं इन सब की जानकारी प्रशासन को लेना चाहिए ताकि अगली बार फिर कोई बड़ा कांड पीथमपुर में ना हो । चुकी पीथमपुर औद्योगिक केंद्र है और यदि इस तरह की घटनाओं से औद्योगिक क्षेत्र पर फर्क पड़ता है आगे इस तरह की घटनाएं ना इन पर लगाम लगाई जा सके उसके लिए जरूरी है कि पीथमपुर क्षेत्र में प्रशासन के द्वारा लैंड सर्वे करवाकर कार्रवाई करवाना सुनिश्चित किया जाए । भविष्य में पीथमपुर क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से शांति बहाली की दृष्टि से पीथमपुर का भविष्य अब प्रशासन को तय करना होगा हालांकि इस अवैध साम्रज्य पर पीथमपुर नगरपालिका पर उंगली उठना लाजमी है। पीथमपुर व आसपास सटे इलाको में क़ई आशिक पठान जैसे क़ई लोगो ने अवैध अतिक्रमण कर य्या खेतो में ही कमरे बना दिये है जिस पर आज तक कार्यवाही की गाज नही गिरी वही इन अवैध अतिक्रमण कारियों पर सत्ता व विपक्ष दोनो ही तरफ के नेताओ के वरद हस्त के चलते कार्यवाही नही होती।