गुप्ती घा जिगर मैं होगे घणी सतावै मतना | निर्दोषी सै बहु तेरी...# मा. रामप्रताप रंगा #

गुप्ती घा जिगर मैं होगे घणी सतावै मतना | निर्दोषी सै बहु तेरी...# मा. रामप्रताप रंगा #

किस्सा चापसिंह ( जाट मेहरसिंह)