यह भजन/कविता भगवद्गीता के पहले अध्याय — अर्जुन विषाद योग और पात्र परिचय की आत्मा को मेरे अपने भाव और समझ के अनुसार प्रस्तुत करता है। महाभारत केवल बाहर लड़ा जाने वाला युद्ध नहीं है — वह हमारे भीतर मोह, भय, संस्कार, विवेक, साहस और धर्म के रूप में हर दिन चलता है। इस रचना में: • धृतराष्ट्र = अज्ञान • संजय = विवेक • दुर्योधन = वासना • द्रोण = संस्कार • भीष्म = प्रतिज्ञा • पांडव = हमारे सद्गुण • और श्रीकृष्ण = आत्मा का मार्गदर्शन के रूप में दिखाए गए हैं। यह रचना गीता श्रृंखला का अगला चरण है यह प्रस्तुति केवल सुनने के लिए नहीं, अपने भीतर झाँकने और जीवन को समझने के लिए है। vocals, and video — is 100% original and created by me. I have written, composed, performed, and produced this bhajan myself. Please respect my work, and do not reuse or claim it without permission. Hashtags: #ArjunVishadYog #PaatraParichay #BhagavadGita #GeetaSeries #Mahabharat #KrishnaUpdesh #SpiritualBhajan #OriginalBhajan #GeetaChapter1 #indianspirituality TEACHING (Spiritual Teaching – 180–200 Words) महाभारत केवल एक युद्ध की कथा नहीं है, यह हमारे भीतर हर दिन चलने वाला संघर्ष है। जब भी जीवन में मोह बढ़ता है, तब अर्जुन की तरह हमारा मन भी विषाद से भर जाता है। हम डरते हैं कि कहीं संबंध, संपत्ति या पहचान छूट न जाए। यही डर हमें भीतर से कमजोर बना देता है। गीता हमें सिखाती है कि अज्ञान ही धृतराष्ट्र है, जो सत्य देखने नहीं देता। संजय हमारा विवेक है, जो सही-गलत का दर्शन कराता है। दुर्योधन हमारी वासनाएँ हैं और द्रोण हमारे संस्कार। भीष्म हमारी पुरानी प्रतिज्ञाएँ हैं, जिनसे हम बँधे रहते हैं। पांडव हमारे भीतर के सद्गुण हैं और श्रीकृष्ण हमारी आत्मा की आवाज़ हैं। जब जीवन में हम केवल परिणाम के बारे में सोचते हैं, तब हम डर जाते हैं। गीता सिखाती है कि हमें केवल अपना कर्म करना है, फल ईश्वर पर छोड़ देना है। यही निष्काम कर्म का मार्ग है। जब हम अपने भीतर कृष्ण को पहचान लेते हैं, तब विषाद समाप्त होता है और जीवन का मार्ग स्पष्ट हो जाता है। गीता प्रश्न भी है और उत्तर भी। वह हमें यह याद दिलाती है कि सत्य, धर्म और करुणा ही जीवन की सच्ची विजय हैं। महाभारत बाहर नहीं, हमारे भीतर लड़ा जाता है… कोई धृतराष्ट्र बन अंधा रहता, कोई संजय सा सच देख पाता है… कोई अर्जुन बन डर से काँपता है, कोई कृष्ण बन मार्ग दिखाता है… Video Chaptars: 00:00 – Shankh Dhwani & Divine Opening 00:20 – Arjun Ka Vishad (Moh aur Bhay) 01:05 – Mahabharat Hamare Bheetar 01:50 – Paatra Parichay (Andar ke Prateek) 02:40 – Paanch Pandav = Paanch Gun 03:30 – Krishna = Aatma ka Margdarshak 04:20 – Anyaay se Nyaay ka Yuddh 05:35 – Geeta Ka Saar (Tat Tvam Asi) 05:56 – Shankh Dhwani & Ending Message 🔱 MUKHDA ( जब-जब मोह जीवन में बढ़ता, विषाद से मन भर जाता, छूट न जाए वस्तु या रिश्ता, इस डर से मन घबराता… गुरु जब कृष्ण रूप में आते, सब कुछ ठीक हो जाता… सब कुछ ठीक हो जाता… 🎵 ANTARA 1 – अर्जुन का भाव अर्जुन जैसा हर इक मानव, इस संघर्ष से गुजरता, राह न दिखती जब जीवन में, मन भीतर से तड़पता, रथ के पीछे बैठा अर्जुन, धनुष हाथ से छूट गया, गुरु की दृष्टि पड़ती ही अंधियारा सब टूट गया… 🎵 ANTARA 2 – पात्र हमारे भीतर धृतराष्ट्र है अज्ञान हमारा, संजय विवेक की दृष्टि, दुर्योधन है मन की वासना, द्रोण हैं संस्कार की शक्ति, जन्म-जन्म की इच्छाएँ जो संस्कारों में बसी रहीं, भीष्म बनकर अडिग प्रतिज्ञा सीने में चुपचाप खड़ी… ANTARA 3 – नारी शक्तियाँ गांधारी बनी बुद्धि अंधी, आँखों पर पट्टी डाली, कुंती बनी त्याग की मूरत, माद्री ममता की लाली… ANTARA 4 – पांडव = हमारे सद्गुण युधिष्ठिर है निष्काम कर्म, भीम है साहस का ज्वार, अर्जुन विवेक की ज्वाला, गलत से लड़ने का अधिकार, नकुल धैर्य की शीतल छाया, सहदेव सच्चा ज्ञान, धर्म के साथ खड़े हैं कृष्ण, यही है जीवन की पहचान… ANTARA 5 – युद्ध का अर्थ यह युद्ध है अन्याय से न्याय का, असत्य से सत्य का शोर, बुराई से अच्छाई की लड़ाई, हर पल हर इक ओर… ANTARA 6 – गीता का तत्वज्ञान (FINAL) गीता हर प्रश्न का उत्तर है, “तत् त्वम् असि” सार, ईश्वर की कला, आत्मा का पथ, मोक्ष का उजला द्वार, उसकी प्राप्ति का जो मार्ग बने, वही तो गीता ज्ञान… MUKHDA जब-जब मोह जीवन में बढ़ता, विषाद से मन भर जाता, छूट न जाए वस्तु या रिश्ता, इस डर से मन घबराता… गुरु जब कृष्ण रूप में आते, सब कुछ ठीक हो जाता… सब कुछ ठीक हो जाता… ENDING DOHRA अर्जुन विषाद योग का अर्थ यही, पात्र परिचय का सार, युद्ध हमारे भीतर चलता — जीवन का यही विस्तार। Follow me on: Instagram: / premranigarg Facebook: / prem Rani Garg Copyright © 2025 Prem Rani Garg -All Rights Reserved