हिंदी कहानी के विकास में मुंशी प्रेमचंद का योगदान

हिंदी कहानी के विकास में मुंशी प्रेमचंद का योगदान

हिन्दी कथा साहित्य का मूल विन्यास प्रेमचंद के आस पास ही घूमता है। कथा साहित्य में उनके योगदान के कारण संपूर्ण कथा साहित्य को उनके नाम से अभिहीत किया जाता है। उन्नसवीं सदी के उत्तरार्ध में गद्य की विभिन्न विधाओं का विकास हुआ। जिसके परिणाम स्वरुप कथा साहित्य अपने शैशव काल में अवतीर्ण था। जिसे प्रेमचंद ने विकसित और पल्लवित कर विशाल वृक्ष का रूप दिया। उनकी पहली कहानी पंच परमेश्वर 1916 में और आखिरी कहानी कफन 1936 में प्रकाशित हुई। जो कि हिन्दी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है। उन्होनें कुल 300 कहानियाँ लिखी। जिनमें ईदगाह, मंत्र, पूस की रात, सवा सेर गेंहूँ, बड़े भाई साहब, बड़े घर की बेटी, शतरंज के खिलाड़ी, ठाकुर का कुआँ, कजाकी, दो बैलों की कथा, बूढ़ी काकी, नमक का दारोगा, मोटेराम शास्त्री, जैसी कालजयी कहानियां शामिल हैं। हिन्दी कहानी में मील के पत्थर की तरह उनके योगदान का याद किया जाता है। उनका योगदान उनके नाम के साथ अमर रहेगा।    • प्रेमचंद: एक विशेष अध्ययन (B.A.first year ...   #hindi#sahitya#kahani