श्री राम भुजंग अष्टकम्, SRI RAMA BHUJANGA ASHTAKAM भजे विशेष सुंदरम् समस्तपाप खंडनम् । स्वभक्त चित्त रंजनम् स दैवराम मद्वयम् ॥ जटा कलाप शोभितम् समस्त पाप नाशकम् । स्वभक्त भीति भंजनम् भजेह राम मद्वयम् ॥