मोदी जी पूर्व सैनिकों की होली रंगीन होगी या बेरंगी?#modi #OROP

मोदी जी पूर्व सैनिकों की होली रंगीन होगी या बेरंगी?#modi #OROP

मीडिया को जानकारी देते हुए पूर्व जवान एस पी सिंह गोसल ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा दिनांक 23 दिसंबर 2022 को प्रेस विज्ञप्ति जारी करके एक रैंक एक पेंशन को लागू करने के बारे में जानकारी दी थी। जिसमें बताया गया था कि कलर सर्विस करके आए जवानों तथा 01 जुलाई 2014 से पहले प्री मैच्योर रिटायरमेंट आए सैनिकों को ही एक रैंक एक पेंशन का लाभ दिया जाएगा और 01 जुलाई 2014 के बाद प्री मैच्योर रिटायरमेंट आए जवानों को एक रैंक एक पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा । जवान कभी भी प्री मैच्योर रिटायरमेंट नहीं होते क्योंकि उनका एग्रीमेंट 15 +2 साल का होता है, जबकि आफिसर्स का एग्रीमेंट 58 साल तक का होता है और अगर आफिसर्स 58 साल से पहले रिटायरमेंट लेते हैं तो उसको प्री मैच्योर रिटायरमेंट कहा जाता है । उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए एक रैंक एक पेंशन में जवानों के साथ भेदभाव करते हुए सिर्फ आफिसर्स को ही लाभ दिए गए हैं। एक रैंक एक पेंशन पर सिर्फ जवानों का हक़ बनता है क्योंकि सिविलयन कर्मचारी और सेना के आफिसर्स 58 से 60 साल की उम्र में पेंशन आते हैं. जबकि सेना का एक जवान तकरीबन 34 से 40 साल की उम्र में पेंशन आता है। मतलब कि जवानों को सिविलयन तथा आफिसर्स से 60-34=26 साल कम नौकरी में पेंशन भेज दिया जाता है और इस तरह जवानों सालाना लगने वाली 26 इंक्रीमेंट सिविलयन तथा आफिसर्स से कम मिलती हैं। इस लिए एक रैंक एक पेंशन की परिभाषा के मुताबिक सेना के आफिसर्स को एक रैंक एक पेंशन लागू नहीं होनी चाहिए लेकिन अफ़सोस है कि केंद्र सरकार द्वारा आफिसर्स से मिलीभगत करके 85% हिस्सा सेना में 3% गिनती वाले आफिसर्स को दे दिया गया और सेना में 97% गिनती वाले जवानों को सिर्फ 15% हिस्सा ही दिया गया है। सेना में अच्छी सर्विस करने के लिए सम्मान स्वरूप में दिए जाने वाले आनरेरी रैंकों आनरेरी नायक हवलदार नायब सूबेदार सूबेदार सूबेदार मेजर, लेफ्टीनेंट, कैप्टन की पेंशन में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है और इसी तरह से नायब सूबेदार, सूबेदार सूबेदार मेजर रैंकों की पेंशन में भी एक पैसे की बढ़ोतरी नहीं की , गई है लेकिन जिन आफिसर्स का एक रैंक एक पेंशन पर हक़ ही नहीं बनता था, उनको भारी भरकम लाभ देकर खुश किया गया है । वहीं पर सेना के आफिसर्स द्वारा संचालित यूनियनों द्वारा एक बार भी जवानों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई है। इस समय बोलते हुए सुरजीत सिंह के द्वारा जानकारी दी गई कि युरोप देशों की तरफ देखकर भारतीय सेना में लागू की गई मिलिट्री सर्विस पे में भी जवानों को 5200 रुपए और ऑफिसर्स को 15,500 रुपए प्रति महीना दी जा रही है, जबकि हैरानी की बात यह है कि युरोप देशों में मिलट्री सर्विस पे जवान आफिसर्स को एक बराबर दी जा रही है। हमारी मांग है कि मिलट्री सर्विस पे आफिसर्स जवानों को एक समान दी जाए। इसी तरह सातवें पे कमीशन में आफिसर्स को 2.81 तक का तथा जवानों को 2.57 का भेदभाव वाला फार्मूला लागू किया गया। जबकि पूरे संसार में तथा भारत के पहले छह पे कमिशनों में भी ऐसा भेदभाव नहीं हुआ है । इस समय बोलते हुए सुरजीत सिंह के द्वारा जानकारी दी गई कि युरोप देशों की तरफ देखकर भारतीय सेना में लागू की गई मिलिट्री सर्विस पे में भी जवानों को 5200 रुपए और ऑफिसर्स को 15,500 रुपए प्रति महीना दी जा रही है, जबकि हैरानी की बात यह है कि युरोप देशों में मिलट्री सर्विस पे जवान आफिसर्स को एक बराबर दी जा रही है। हमारी मांग है कि मिलट्री सर्विस पे आफिसर्स जवानों को एक समान दी जाए । इसी तरह सातवें पे कमीशन में आफिसर्स को 2.81 तक का तथा जवानों को 2.57 का भेदभाव वाला फार्मूला लागू किया गया। जबकि पूरे संसार में तथा भारत के पहले छह पे कमिशनों में भी ऐसा भेदभाव नहीं है । हुआ इस समय पंजाब से आए पूर्व सैनिक तस्वीर सिंह ने जानकारी दी कि डिसएबिलिटी शरीर की होती है। ना कि रैंक की । लेकिन सेना में दुश्मनों से लड़ते हुए हंड्रेड परसेंट डिसेबल हुए आफिसर्स को ढाई लाख महीना डिसएबिलिटी पेंशन तथा जवान को अठारह हजार प्रति महीना ही डिसएबिलिटी पेंशन दी जा रही है। शरीर की अहमियत जवान तथा आफिसर्स की एक समान है तो डिसएबिलिटी पेंशन क्यों नहीं ? उन्होंने आगे बताया कि जवानों की वीर नारियों से भी भारी भेदभाव किया गया है। जिन आफिसर्स की विधवाओं की 2006 में फेमिली पेंशन 5880 रुपए थी उनको आज 75 हजार से ज्यादा फेमिली पेंशन मिल रही है, जबकि 2006 में जिस जवान की विधवा को 3500 रुपए फेमिली पेंशन मिलती थी उनको आज 9 हज़ार रुपए प्रति महीना ही पेंशन मिल रही है। इस तरह केंद्र सरकार ने आफिसर्स की विधवाओं की फैमिली पेंशन जवानों की विधवाओं के मुकाबले 628% अधिक बढ़ाई है। ऐसा भेदभाव वाला अन्याय तो अंग्रेजों ने भी नहीं किया था । बिल्कुल इसी तरह सर्विस पेंशन में भी केंद्र सरकार द्वारा आफिसर्स की पेंशन जवानों के मुकाबले 200% से अधिक बढ़ाई गई है । इस समय नेशनल स्पोक्समैन नलिन तलवार जी ने बताया कि सेना के आफिसर्स द्वारा 1 लाख से अधिक जवानों को गुलाम के रुप में बटमैन बनाकर अपने घरों में रखा हुआ है, जबकि ऐसा कोई कानून नहीं है । आफिसर्स तथा आफिसर्स की पत्नियों द्वारा घर में नाजायज तौर पर गैर कानूनी रखें हुए बटमैन जवानों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। जिसके कारण सही ड्यूटी करने वाले जवानों को डबल ड्यूटी करनी पड़ती और उनको आराम का समय नहीं मिलता है । इसी वजह से हर साल सैकड़ों जवान खुदकुशी करने को मजबूर हैं । इस समय पर देश के अलग अलग राज्यों से आई जवानों की यूनियनों मिलकर धरना प्रदर्शन को अनिश्चितकालीन समय के लिए आगे तब तक बढ़ाने का फैसला किया, जब तक केंद्र सरकार जवानों को इंसाफ नहीं देती। यूनियनों मिलकर धरना प्रदर्शन को अनिश्चितकालीन समय के लिए आगे तब तक बढ़ाने का फैसला किया, जब तक केंद्र सरकार जवानों को इंसाफ नहीं देती ।