卐 स्वस्तिक यह भारतीय संस्कृती का शुभप्रतिक है। स्वस्तिक का मतलब 'कल्याण हो' होता है। स्वस्तिक में सूर्य, इंद्र, वायु, पृथ्वी, लक्ष्मी, विष्णु, ब्रह्मदेव, शिवपार्वती, श्रीगणेश ऐसे अनेक देवो का समावेश होता है। 卐 शांति, समृद्धि और मंगल का प्रतिक याने स्वस्तिक। किसीभी पूजा में पहला चिन्ह होता है। 卐 स्वस्तिक गति का घोतक है। उसके चार हाथ याने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष है। ये श्री विष्णु के हाथ है जो चारो दिशा का पालन एवं रक्षा करते है। 卐 स्वस्तिक ये सूर्य का आसन है। इसमें शोभा, सुसंवाद, उल्हास, प्रीती, सौन्दर्य, आशिर्वाद, कल्याण, शांती गुण पाये जाते है। 卐 स्वस्तिक की क्षेतिज रेखा याने विश्व का विस्तार और ऊर्ध्वाधर रेखा याने विश्वके उत्पति का कारण। स्वस्तिक का केंद्र बिंदू भगवान श्री विष्णुका नाभिकमल है जो श्री ब्रह्माजी का उत्तपतिस्थान है। 卐 भगवन के सामने स्वस्तिक बनाने से स्त्री को विधवा होने का डर नहीं रहता ऐसा पद्मपुराण में कहा गया है। भारतीय नारी की मंगल भावना का प्रतिक याने स्वस्तिक। स्वस्तिक याने कल्याण की रचना, सर्व दिशाओं का सौरभ, मनुष्य के पुरुषथार्थ का प्रेरनाबल,निर्मित्तिके सहाय की सूचना और देश, काल का मिलान है। ऐसे विविध अंगों से बने हुवे स्वस्तिक जैसे शुभचिन्हको प्रणाम....🙏🙏 *अगर आप ऐसे संदेश या टिप्स पाना चाहते हो तो अपना नाम, व्हाट्सएप्प नंबर और शहर +919824853607 पर व्हाट्सएप करें*। 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 卐 श्री उमेशकुमार दवे, Rajkot, Gujarat ज्योतिषभुषण, ज्योतिषअलंकार (HNG Uni. Patan) Visit, like & comment on my facebook page / shri-umeshkumar-dave-1367797676572147