#HamariRai | मनमोहन सिंह की मोदी को नसीहत | Manmohan Singh in Gujarat | 03 Dec. 2017

#HamariRai | मनमोहन सिंह की मोदी को नसीहत | Manmohan Singh in Gujarat | 03 Dec. 2017

#Gujarat4Vikas | #ManmohanSinghInSurat | #UPCM | #TamilNadu | #CycloneOckhi| पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह कल #सूरत पहुंचे और उन्होंने व्यापारियों से मुलाकात की। ज़ाहिर है कि उनका ये दौरा गुजरात चुनाव को लेकर था। जिसमें उन्होंने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर अपने विचार साझा किए। मनमोहन सिंह के 10 सालों के कार्यकाल में न जाने कितनी बार विपक्षियों ने उनके मितभाषी होने का मजाक उड़ाया है। मौन मोहन सिंह जैसे विशेषणों से उनका मखौल उड़ाया गया। ऐसे देखा जाये तो भारतीय संस्कृति में मौन का बड़ा महत्व है। ज्ञानी महात्माओं के मौनव्रत धारण करने की कथाएं हैं। लेकिन भारतीय संस्कृति के स्वघोषित ठेकेदारों ने मौन का ही मज़ाक बना डाला। खैर... डा.मनमोहन सिंह विद्वान हैं और अपने विषय के ज्ञाता भी। उन्हें पता है कि कब, कहां, कितना बोलना चाहिए। इसलिए जब वे बोलते हैं तो देश उन्हें ध्यान से सुनता है और उनकी बातों पर गौर करता है। जुमलेबाजी कहकर उड़ाता नहीं। नोटबंदी के बाद जब एक सांसद और अर्थशास्त्री की हैसियत से उन्होंने इसकी खामियां संसद में गिनाईं तो देश ने उसे भी सुना। लेकिन संसद में मनमोहन सिंह के बयान के बाद भाजपा के सांसदों और खुद पीएम #मोदी ने उन पर तंज कसा, लेकिन इससे डा. सिंह की प्रतिष्ठा कम नहीं हुई। अभी भी जब वे गुजरात में गए, तो यहां भी उनके भाषण की खूब चर्चा हो रही है। न कोई बड़ी रैली, न रोड शो, न लाखों की जुटाई हुई भीड़, फिर भी हैशटैग मनमोहन सिंह इन गुजरात सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहा है। शनिवार को मनमोहन सिंह ने सूरत में व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीडीपी में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि खुशी की बात है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी की इस वृद्धि से आर्थिक मंदी का रुख उलट गया है, क्योंकि इसमें छोटे और मंझोले क्षेत्रों के आंकड़े नहीं हैं, जिसे नोटबंदी और जल्दबाजी में लागू किए गए जीएसटी के कारण बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। एक विरोधी दल के नेता ऐसी बात कहते तो इसे राजनीतिक बयान कहा जा सकता था। लेकिन डा. सिंह ने एक अर्थशास्त्री के नाते हालात का विश्लेषण कर ऐसी बात कही है, तो उसे कैसे नकारा जा सकता है। #जीडीपी बढऩे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फौरन अपनी ही पीठ थपथपाई थी, लेकिन उन्होंने देश को यह नहीं बताया था कि इस वृद्धि में कौन से क्षेत्र शामिल किए गए और किन्हें जानबूझकर छोड़ा गया। डा.सिंह ने आर्थिक क्षेत्र की कुछ और बड़ी समस्याएं गिनाईं, जैसे कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर गिरकर 1.7 प्रतिशत हो चुकी है, जो कि पिछली तिमाही में 2.3 फीसदी थी। कृषि के बाद सबसे ज्यादा नौकरियां विनिर्माण क्षेत्र में कम हुई हैं। डा. सिंह के मुताबिक हमारी जीडीपी की विकास दर में हर एक प्रतिशत की गिरावट से देश को 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है। उन्होंने सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि इस गिरावट से देशवासियों पर पड़े असर के बारे में सोचें. उनकी नौकरियां खो गईं और नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर खत्म हो गए. व्यवसायों को बंद करना पड़ा और जो उद्यमी सफलता की राह पर थे, उन्हें निराशा हाथ लगी है। डा.मनमोहन सिंह की इन बातों में राजनीति नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की कड़वी सच्चाई है, जिससे आम आदमी रोजाना दो-चार हो रहा है। लेकिन सरकार इस हकीकत से मुंह फेरते हुए, केवल अपनी वाहवाही करवाने में लगी हुई है। और जब उसके पास तर्क-कुतर्क खत्म हो जाते हैं, तो मोदीजी के चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री बनने की इमोशनल ब्लैकमेलिंग शुरु हो जाती है। #भाजपा इस बात के सहारे यह साबित करने की कोशिश करती है कि वह गरीबों की सबसे बड़ी रहनुमा है, जबकि कांग्रेस गरीबविरोधी है। डा.मनमोहन सिंह ने सूरत में भाजपा के इस इमोशनल अत्याचार का जवाब भी पेश किया। जब उनसे पूछा गया कि वे अपनी गरीबी की पृष्ठभूमि के बारे में बात क्यों नहीं करते हैं, जिस तरह मोदी हमेशा बचपन में अपने परिवार की मदद के लिए गुजरात के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने की बात करते हैं। तो उनका जवाब था कि वो नहीं चाहते कि लोग उनकी गरीबी की पृष्ठभूमि पर तरस खाएं. उन्होंने ये भी कहा कि इसे लेकर वे अपने उत्तराधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई कम्पटीशन नहीं करना चाहते। गौरतलब है कि अविभाजित पंजाब के गाह नामक गांव में बिजली, स्कूल, अस्पताल जैसी सुविधाओं के बिना मनमोहन सिंह ने 12 साल बिताए और मीलों चलकर स्कूली पढ़ाई पूरी की। केरोसिन की मंद रोशनी में पढऩे के कारण उनकी आंखों पर भी असर पड़ा। लेकिन इस अभाव को उन्होंने कभी देश के सामने बार-बार गिनाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश नहीं की। 10 साल से ज्यादा मुख्यमंत्री और 3 साल से अधिक वक्त तक प्रधानमंत्री रहने के बाद अब मोदीजी को भी अपने चाय वाला होने का जिक्र छोडऩा चाहिए और देश के ज़रूरी मुद्दों पर सार्थक बात करनी चाहिए। #RajeevRanjanSrivastava DB LIVE APP :https://play.google.com/store/apps/de... DB LIVE TV : http://dblive.tv/ SUBSCRIBE TO OUR CHANNEL: https://www.youtube.com/channel/UCBbp... DESHBANDHU :http://www.deshbandhu.co.in/ FACEBOOK :   / dblivenews   TWITTER :   / dblive15