नमस्कार 🙏 स्वागत है आपके अपने चैनल पर। आज के इस वीडियो में हम सुनेंगे पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi) की पावन व्रत कथा। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए वरदान मानी जाती है जो संतान सुख की कामना करते हैं। इस वीडियो में जानिए भद्रावती नगर के राजा सुकेतुमान की कहानी, जिन्हें सब कुछ होने के बाद भी संतान न होने का गहरा दुःख था। कैसे उन्होंने इस व्रत के प्रभाव से अपना खोया हुआ सुख पाया? पूरी कहानी जानने के लिए वीडियो को अंत तक देखें। 🔔 Subscribe करें और बेल आइकॉन दबाएं: वीडियो के मुख्य अंश (Timestamps): 0:00 - प्रस्तावना (Introduction) 1:00 - राजा सुकेतुमान का दुःख (The King's Sorrow) 3:00 - राजा का वन विहार (Journey to the Forest) 4:30 - सरोवर और ऋषियों के दर्शन (Meeting the Sages) 5:00 - पुत्रदा एकादशी का महत्व (Significance of the Vrat) 6:30 - व्रत का फल और निष्कर्ष (Conclusion) इस वीडियो में आप जानेंगे: पुत्रदा एकादशी क्यों मनाई जाती है? राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या की पौराणिक कथा। संतान प्राप्ति के लिए इस एकादशी का महत्व। पुत्रदा एकादशी का अर्थ क्या है? मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः || अगर आपको यह कथा पसंद आई हो, तो कमेंट में "जय श्री हरि" या "जय श्री कृष्णा" अवश्य लिखें। वीडियो को लाइक करें और अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि वे भी इस पुण्य कथा का लाभ उठा सकें।