काल भैरव अष्टमी 2017 - जाने पूजा विधि और महत्व Kaal Bhairav Ashtmi Puja vidhi aur Mahatav Official Link : https://goo.gl/p2gF5M भैरवाष्टमी पूजन की विधि – आपको बता दें कि भगवान शिव के इस रुप की उपासना षोड्षोपचार पूजन सहित करनी चाहिए। यही नहीं, रात के समय जागरण भी करें व इनके मंत्रों का जाप भी करते रहे। साथ ही भजन कीर्तन करते हुए भैरव की कथा पढ़ें और आरती भी ज़रूर से करें। ध्यान रहें की इनकी खुशी के लिए आप अवश्य किसी काले कुत्ते को भोजन कराएं, क्योंकि ऐसा करना शुभ माना जाता है। कहते तो यह भी है कि इस दिन भैरव जी की पूजा व व्रत करने से आपकी सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और साथ ही भूत, पिशाच एवं काल भी कोसो दूर रहता है। क्या है भैरव साधना का महत्व – ऐसा मानना है कि भैरव साधना करने से आपके हर प्रकार के भय का नाश होता है और इन्हीं में त्रिशक्ति भी समाहित होती हैं। यूं तो हिंदू देवताओं में भैरव जी का बहुत ही महत्व है, इन्हें दिशाओं के रकक्षक और काशी के संरक्षक भी कहा जाता है। दरअसल, भगवान शिव से ही भैरव जी की उत्पत्ति हुई थी जो कई रुपों में विराजमान हैं जैसे कि बटुक भैरव और काल भैरव भी यही हैं। इन्हें रुद्र, क्रोध, उन्मत्त, कपाली, भीषण और संहारक जैसे कई नामों से पुकारा जाता है। भैरव को भैरवनाथ भी कहा जाता है और नाथ सम्प्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व रहा है. भैरव की पूजा के लिए मंगलवार का दिन शुभ – भैरव आराधना की मदद से आपको शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में हमेशा से विजय प्राप्त होती है और साथ ही व्यक्ति में साहस का संचार भी होता है। बता दें कि इनकी आराधना करने से आपके ऊपर की शनि का प्रकोप शांत होता है। भैरव आराधना का दिन रविवार और मंगलवार सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है। जान लें कि भैरव साधना और आराधना से पूर्व अनैतिक कृत्य आदि से दूर रहना चाहिए, पवित्र होकर ही सात्विक आराधना की जाती है तभी फलदायक होती है।