रावण की कहानी जानिये लंकापति के जन्म, पुत्र और मौत से जुड़ी कुछ रोचक बातें

रावण की कहानी जानिये लंकापति के जन्म, पुत्र और मौत से जुड़ी कुछ रोचक बातें

रावण की कहानी जानिये लंकापति के जन्म, पुत्र और मौत से जुड़ी कुछ रोचक बातें रावण की कहानी: रावण को लोग बुराई का प्रतीक मानते हैं, और उससे घृणा करते हैं। ये सच बात है कि उसमें राक्षस प्रवृत्ति कूट कूट कर भरी थी। लेकिन इसके बावजूद उसके अच्छाईयों को नकारा नहीं जा सकता है। रावण में अवगुण तो थे ही, लेकिन रावण में कई ऐसे गुण थे, जो उसे प्रकांड विद्वान बनाते हैं। रावण को वेद शास्त्र से लेकर, ज्योतिष विद्या का बहुत ही अच्छा ज्ञान था। उसे तंत्र मंत्र का भी भलि भांति ज्ञान था।और भगवान शंकर का बहुत ही बड़ा भक्त था। तो आइये जानते हैं रावण के बारे में कुछ दिलचस्प बातें । रावण को महाशक्तिशाली और महान पंडित माना जाता था. भगवान राम भी अच्छे से जानते थे कि उनसे जिसने शिक्षा ली है उसने आगे कमाल किया है. इसीलिए, भगवान राम ने भाई लक्ष्मण से कहा था कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता. श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए. रावण ने कुछ नहीं कहा तो रामजी ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान लेना हो तो उसके चरणों में खड़ा होना चाहिए. तुम जाओ और सिर के पास न खड़े होकर पैरों के पास खड़े हो और कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो कोई नहीं दे सकता. जिसके बाद महापंडित रावण ने लक्ष्मण को सफल रहने के लिए तीन बातें बताई. देखा जाए तो आज ये तीन बातें ऑफिस में काम करने वालों पर बिलकुल सटीक बैठती हैं. जिससे कोई भी सफलता प्राप्त कर सकता है. जन्म रावण के जन्म की अलग अलग कहानियाँ हैं। विभिन्न पौराणिक कथाओं में रावण के जन्म को लेकर अलग अलग कथाएं हैं। वाल्मिकी द्वारा रचित रामायण के अनुसार हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु दूसरे जन्म में रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए। पौराणिक कथाओं के अनुसार ऋृषि मुनि भगवान विष्णु के दर्शन हेतु बैकुंठ गए थे, लेकिन भगवान विष्णु के दो द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें अंदर प्रवेश करने से मना कर दिया। न्म स्थान रावण का जन्म स्थान गौतम बुद्ध नगर के बिसरख गाँव में माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस गांव का नाम पहले विश्रवा ही था। विश्रवा रावण के पिता का नाम है। समय के साथ साथ इस गांव का नाम विश्रवा से बिसरख हो गया । कहा जाता है कि यहाँ पर एक शिवलिंग है जिसकी पूजा रावण और उसके पिता विश्रवा किया करते थे। ये अष्टकोण के आकार का शिवलिंग खुद ही पृथ्वी से निकलकर आया था। रावण के पिता का नाम रावण के पिता का नाम विश्रवा था, जो महान ऋृषि मुनि पुलस्त्य के पुत्र थे। विश्रवा का मतलब वेद ध्वनि सुनने वाला। महर्षि विश्रवा की दो पत्नियां थी। एक का नाम देववर्णिनि तो दूसरे का नाम कैकसी था। रावण कैकसी और विश्रवा का पुत्र था। रावण के कितने पुत्र थे रावण की तीन पत्नियां थीं। मंदोदरी, दम्यमालिनि और तीसरे का नाम कहीं उल्लेखित नहीं है। मंदोदरी से तीन पुत्र त्रिशिरा, इंद्रजीत और अक्षयकुमार। दम्यमालिनि से एक पुत्र जिसका नाम अतिकाय था। तीसरे पत्नी का नाम कहीं उल्लेखित नहीं है। माना जाता है कि तीसरे पत्नी का वध स्वयं रावण ने कर दिया था, तीसरी पत्नी से भी तीन पुत्र थे। इस प्रकार रावण के कुल सात पुत्र हुए। रावण की कहानी: शव भगवान राम के हाथों रावण के वध के बाद रावण के शव को अंतिम संस्कार के लिए विभिषण को सौंपा गया था। विभिषण को सौंपने के बाद रावण का अंतिम संस्कार हुआ भी या नहीं इस बात को लेकर आज भी संशय है। श्रीलंका में हुए रावण के वध के बाद आज भी वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि रावण का शव धरती पर आज भी मौजूद है। बताया जाता है कि रावण का शव श्रीलंका के रागला के घने जंगलों में ममी के रूप में आज भी सुरक्षित रखा गया है। जिसकी रखवाली के बारे में कहा जाता है कि भयंकर नाग और खुंखार जानवर रावण के शव की रक्षा करते हैं। माना जाता है कि जिस गुफा में रावण तपस्या करता था कि उस गुफा में एक ताबूत में रावण के शव को रखा गया है। उस ताबुत की लंबाई 18 फीट और चौड़ाई 5 फीट है। उस ताबूत पर एक खास किस्म का लेप लगा है, जिससे आज भी ताबूत जस का तस रखा हुआ है।