पौष पुत्रदा एकादशी 2025 में 30 दिसंबर को मनाई जा रही है, जिसके लिए पूजा और व्रत के नियम हैं, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी दल का प्रयोग, सात्विक भोजन और पारण का समय शामिल है, जो 31 दिसंबर को होगा, ताकि संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि की कामना पूरी हो सके. पौष पुत्रदा एकादशी 2025 (Paush Putrada Ekadashi 2025) तिथि: 30 दिसंबर 2025. एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 दिसंबर को सुबह 07:50 बजे. एकादशी तिथि समाप्त: 31 दिसंबर को सुबह 05:00 बजे. पारण समय (30 दिसंबर व्रत के लिए): 31 दिसंबर को दोपहर 01:26 बजे तक. पूजा विधि (Puja Vidhi) स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर रखें, पीले वस्त्र अर्पित करें और चंदन, चावल, फूल, अबीर, गुलाल, इत्र चढ़ाएं. तुलसी और भोग: भगवान विष्णु को तुलसी दल और माखन-मिश्री का भोग लगाएं. मंत्र जाप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. सात्विक भोजन और परहेज: दिन भर फलाहार करें. चावल और तामसिक भोजन से बचें. दोपहर में सोने से बचें और मन शांत रखें. दान: शाम को जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अनाज का दान करें. तेल और नमक का दान वर्जित है. महत्व (Significance) इस दिन व्रत और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यह साल की आखिरी एकादशी है, इसलिए इसका महत्व और