सारे तीर्थो में स्नान करने का जो पुण्यधर्म लगता है वही मात्र महात्म्य सुनने से मिलेगा नए साल पर इससे अच्छा और हो ही नहीं सकता आज नए साल के दिन शुभ शुरुआत करे सब मंगलमय हो सुखी और निरोगी हो कोई दुःख ,हर कष्ट, हर दुःख का निवारण, सारे नकारात्मक प्रभाव नष्ट,मनुष्यों को सद्शिक्षा मिले क्लेश परेशानियाँ न हो सब सुखी हो गीता का श्रीमद्भगवतगीता आत्मा एवं परमात्मा के स्वरूप को व्यक्त करती है, श्रीकृष्ण भगवान के उपदेश रूपी विचारों से मनुष्य को उचित बोध कि प्राप्ति होती है यह आत्म तत्व का निर्धारण करता है उसकी प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है, एवं इस दिव्य ज्ञान की प्राप्ति से अनेक विकारों से मुक्त हुआ जा सकता हैहर कष्ट, हर दुःख के निवारण के लिए गीता की शरण हमारे अंदर के सारे नकारात्मक प्रभाव नष्ट होने लगते हैं। 4 – सभी प्रकार की बुराइयों से दूरी खुद-ब-खुद बनने लगती है। तू सब प्रकार से उस परमेश्वर की ही शरण में (लज्जा, भय, मान, बड़ाई और आसक्ति को त्यागकर एवं शरीर और संसार में अहंता, ममता से रहित होकर एक परमात्मा को ही परम आश्रय, परम गति और सर्वस्व समझना तथा अनन्य भाव से अतिशय श्रद्धा, भक्ति और प्रेमपूर्वक निरंतर भगवान के नाम, गुण, प्रभाव और स्वरूप का चिंतन करते रहना 5 – हमारे अंदर का सारा भय दूर हो जाता है और हम निर्भय बन जाते हैं।ड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना भी बहुत आसानी से कर लेते हैं जिस प्रकार माँ बच्चों को प्यार-दुलार से सुधारति वैसे गीता मनुष्यों को सद्शिक्षा देती हर कष्ट, हर दुःख का निवारण, सारे नकारात्मक प्रभाव नष्ट,मनुष्यों को सद्शिक्षा मिले #आजभागवतगीता_के_15वें_अध्याय_का_पाठ_सुनने_से कई जन्मों के #पाप_धुलेगे शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति रोज सुबह ब्रह्म मुहरत में गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करता है उसे भगवान विष्णु के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है। उनकी आत्मा मृत्यु के पश्चात परमात्मा के स्वरूप में लीन हो जाती है आज के दिन इसको सुनने मात्र से मनुष्य का बुरे से बुरा समय भी टल जाएगा जो नियमित रूप से इस अध्याय को सुनेगे उनके सभी क्लेशो का निवारण होगा उनके सभी जन्मो के पाप धुल जायेगे उन्हें भगवान श्री कृष्ण के विश्व रूप का दर्शन होंगे और अंत में स्वर्ग मिलेगा भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष पाने के लिए व्रत किया जाता है. #भागवतगीता_का_15वें_अध्याय_का_पाठ करते हैं उनके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप-दीप आदि से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। -इस दिन उपवास करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन व्रत करना सर्वोत्तम फल प्रदान करनेवाला होता है। -भगवद्गीता का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता -इस दिन गीता के पाठ से मुक्ति मोक्ष और शान्ति का वरदान मिलता है गीता के पाठ से जीवन की ज्ञात अज्ञात समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। -पूजा पाठ करने के बाद व्रत-कथा सुननी चाहिए। व्रत एकदाशी के अलग दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए। -इसके बाद श्री कृष्ण के मन्त्रों का जाप करें। फिर गीता का सम्पूर्ण पाठ करें या अध्याय 11 का पाठ करें। मोक्षदा एकादशी के दिन गीता का सार जरूर सुनना चाहिए इससे एकादशी का फल पूरा मिलता है