शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव के उग्र, दिव्य और करुणामय स्वरूप का अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र लंका के राजा रावण द्वारा रचित माना जाता है, जो भगवान शिव का परम भक्त था। अपनी गहन भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे अनेक वरदान प्रदान किए। इस स्तोत्र में महादेव के ताण्डव नृत्य, 🌊 जटाओं से बहती गंगा, 🐍 कंठ में विराजमान नागराज, 🌙 ललाट पर शोभायमान चंद्र, 🔥 और प्रलयकारी अग्नि का अत्यंत सुंदर और शक्तिशाली वर्णन किया गया है। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने या सुनने से ✨ मानसिक शांति प्राप्त होती है ✨ आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है ✨ भय और नकारात्मकता का नाश होता है ✨ भक्ति और साधना में स्थिरता आती है यह स्तोत्र विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास, ध्यान और रुद्राभिषेक के समय अत्यंत फलदायी माना जाता है। 🔱 महादेव की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। 🔱 ॐ नमः शिवाय 🕉️ विवरण: • स्तोत्र: शिव तांडव स्तोत्र • रचयिता: लंकापति रावण • भाषा: संस्कृत • देवता: भगवान शिव (महादेव / नीलकंठ / महाकाल)