डॉक्टर भीमराव रामजी अम्बेडकर, जिन्हें हम सब डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम से भी जानते हैं. डॉक्टर अम्बेडकर को संविधान का जनक कहा जाता है. 06 दिसंबर 1956 को उनकी मृत्यु हुई थी. हर साल 06 दिसंबर के दिन को बाबा साहेब की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को मनाने के पीछे का कारण है बाबा साहेब को सम्मान और श्रद्धांजलि देना गरीब और दलित वर्ग की स्थिति में सुधार लाने में डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर का अहम योगदान रहा है. उन्होंने समाज से छूआछूत समेत कई प्रथाओं को खत्म करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया. बौद्ध धर्म के अनुयायियों का मानना है कि उनके बुद्ध गुरु भी डॉ अम्बेडकर की तरह ही सदाचारी थे. बौद्ध अनुयायियों के अनुसार डॉ अम्बेडकर भी अपने कार्यों से निर्वाण प्राप्त कर चुके हैं. इसलिए उनके पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है. बता दें कि डॉक्टर अम्बेडकर ने कई साल बौद्ध धर्म का अध्ययन किया और 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया. मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार भी बौद्ध धर्म के नियम के अनुसार ही किया गया था. मुंबई के दादर चौपाटी में जिस जगह डॉ अम्बेडकर का अंतिम संस्कार हुआ था, उसे अब चैत्य भूमि के नाम से जाना जाता है. उन्हें, “भारतीय संविधान का जनक” कहा जाता है। भारत के लोग सुंदर ढंग से सजायी गयी प्रतिमा पर फूल, माला, दीपक और मोमबत्ती जलाकर और साहित्य की भेंट करके उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। इस दिन लोगों की बड़ी भीड़ उन्हें सम्मान और आदर देने के लिये सुबह संसद भवन परिसर में आती है और एक सबसे प्रसिद्ध नारा “बाबा साहेब अमर रहें” लगाते हैं। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु सहित कुछ लोग कई पवित्र गीत भी गाते हैं।