आचार्य 108 प्रमुख सागर महाराज ने बताया कि मैं कानपुर जैन समाज में 27 वर्ष पहले आया था और यहां पर मेरे केशलोच हुआ। यही पर मेरी पहली दीक्षा हुई और ऐसा महसूस हो रहा है कि जैसे कि मैं अपने मायके में आ गया हूं। कानपुर जैन समाज में एक अपनत्वपन है एवं यहा पर जो भक्त हैं वो दिल से भक्ति करते हैं, दिमाग से नहीं। उनके अनुसार श्रावक को ऐसा ही होना चाहिए।