हर की पौड़ी हरिद्वार में होने वाली गंगा आरती एक भव्य और आध्यात्मिक अनुष्ठान#shortvideo #gangashorts #ganga #nilkanth #hindutemple #uk #minivlog #vlog #shortsfeed #kedarnath #mahadev #love #song #ram #harkipauri #haridwar #uttrakhand #dj #darshan #gangaaarti #mahadev #mahakal #rammandir #khatushyam #khatubhajan #kavadyatra2026 #@Vishuukkavad-2026 #manonadham #rishikesh #bajrangbali #bajrangsetu हर की पौड़ी, हरिद्वार में होने वाली गंगा आरती एक भव्य और आध्यात्मिक अनुष्ठान है, जो दिन में दो बार (सुबह और शाम) होती है, जिसमें बड़े-बड़े दीपक जलाकर, घंटियाँ बजाकर और मंत्रों का जाप करते हुए माँ गंगा की पूजा की जाती है, जिससे नदी में तैरते दीपों का नज़ारा बेहद मनमोहक होता है और यह पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में शुरू किया गया था। आरती के समय मौसम के अनुसार बदलते रहते हैं, लेकिन सामान्यतः सुबह 5:30-6:30 और शाम 6:00-7:00 बजे के बीच होती है और श्रद्धालु अच्छी जगह के लिए पहले से ही पहुँच जाते हैं। आरती का समय: सुबह: लगभग 5:30 से 6:30 बजे (मंगला आरती). शाम: लगभग 6:00 से 7:00 बजे (शृंगार आरती). ध्यान दें: यह समय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर बदलता रहता है, इसलिए पहले पहुँचें. आरती की प्रक्रिया: तैयारी: पंडितों द्वारा गंगा नदी की मूर्ति को घाट पर लाया जाता है और शंखनाद के साथ अनुष्ठान शुरू होता है. मंत्रोच्चार और अर्पण: संस्कृत मंत्रों के साथ कपास, दूध, शहद, घी आदि का अर्पण किया जाता है. गंगा लहरी: पंडित जगन्नाथ द्वारा रचित 'गंगा लहरी' का जाप किया जाता है. अग्नि अनुष्ठान: बड़े अग्नि पात्रों (दीपक) को नदी में डुबोकर और घुमाकर आरती की जाती है, जो गंगा की कोमल गति का प्रतीक है. दीपों का दृश्य: आरती के बाद, नदी में तैरते हज़ारों दीये एक अद्भुत और चमकीला नज़ारा बनाते हैं. मुख्य बातें: स्थान: ब्रह्मकुंड, हर की पौड़ी, हरिद्वार. आयोजक: श्री गंगा सभा. महत्व: यह एक विश्व प्रसिद्ध और बेहद लोकप्रिय आध्यात्मिक अनुभव है, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.