रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना बांसवाड़ा के जय उपाध्याय पुत्र माधो उपाध्याय के साथ घटी है। सावन में भगवान शिव का व्रत रखने के साथ आस्था के चलते वह 44 दिन से मंदारेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सो रहा है। हमेशा की तरह रात 10 बजे करीब जय मंदिर में शिवलिंग के सामने की ओर फर्श पर दरी बिछाकर और चद्दर ओढ़कर सोया। तभी रात करीब ठीक 12 बजे यानी घड़ी के हिसाब से सोमवार का दिन लगते ही। कोबरा प्रजाति का एक सांप दबे हुए बिस्तर तक पहुंचा। सोते हुए जय के बिस्तर में घुस गया। तब तक जय गहरी नींद में था। उसे बिस्तर में सांप होने की भनक तक नहीं लगी। जैसा कि जय ने बताया कि 2 से 3 मिनट तक सांप उसकी जांघ पर लिपटा रहा। इसके बाद उसने करवट ली तो सांप भी हिला। उसने सामान्य मेढक मानकर पैर से उसे दूर करने की कोशिश की। तभी उसे किसी और जीव के होने का अहसास हुआ। वह बिना देर लगाए चद्दर लेकर दूसरे छोर पर खड़ा हुआ। देखा तो पता चला कि बिस्तर में सांप है। तभी सांप ने हवा में उछलकर उस पर झपट्टा मारने की काेशिश की। गनीमत रही कि वह नींद में होते हुए भी सांप की पकड़ से दूर हो गया। बिना देर लगाए सांप भी दूसरी ओर भाग गया।