|Story of Kashi Vishwanath jyotirling|गंगा आरती|मोक्ष अनुभव|शिव की प्रिय नगरी काशी| #ai #yt #shiv

|Story of Kashi Vishwanath jyotirling|गंगा आरती|मोक्ष अनुभव|शिव की प्रिय नगरी काशी| #ai #yt #shiv

आज के इस वीडियो में हम जानेंगे — काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा, मंदिर पर हुए मुगल आक्रमण, उसका पुनर्निर्माण, वाराणसी के पवित्र घाटों का इतिहास और जानेंगे कि क्यों काशी को ‘अविनाशी नगरी’ कहा जाता है। तो चलिए, एक दिव्य और ऐतिहासिक यात्रा पर निकलते हैं।" काशी (वर्तमान वाराणसी) को शिव की नगरी कहा जाता है। यह स्थान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक — काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का स्थल है। इसके पीछे एक अत्यंत रोचक और आध्यात्मिक कथा है: शिव का निवास — अविमुक्त क्षेत्र: काशी को "अविमुक्त क्षेत्र" कहा गया है — अर्थात ऐसा स्थान जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते। ऐसा माना जाता है कि जब सृष्टि का विनाश होगा, तब भी काशी को शिव अपनी त्रिशूल पर रखकर सुरक्षित करेंगे। कथा के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। ब्रह्मा ऊपर जा रहे थे, विष्णु नीचे। उसी समय एक अनंत प्रकाशस्तंभ (ज्योति) प्रकट हुआ। शिव उस ज्योति रूप में प्रकट हुए और कहा कि जो इस ज्योति का आदि और अंत खोजेगा वही श्रेष्ठ होगा। ब्रह्मा ने झूठ बोला कि उन्होंने आदि देख लिया, जबकि विष्णु ने स्वीकार किया कि वह अंत तक नहीं पहुंच पाए। शिव ने ब्रह्मा के झूठ पर क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया कि उनकी पूजा नहीं होगी। यही ज्योति स्तंभ बाद में ज्योतिर्लिंग कहलाया। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान शिव देवी पार्वती से विवाह करने के बाद कैलाश पर्वत आकर रहने लगे. वहीं देवी पार्वती अपने पिता के घर रह रही थीं जहां उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था. देवी पार्वती ने एक दिन भगवना शिव से उन्हें अपने घर ले जाने के लिए कहा. भगवान शिव ने देवी पार्वती की बात मानकर उन्हें काशी लेकर आए और यहां विश्वनाथ-ज्योतिर्लिंग के रूप में खुद को स्थापित कर लिया. इस मंदिर का उल्लेख महाभारत और उपनिषदों में भी है. वैदिक पुराणों में बताया गया है कि काशी में भगवान विष्णु के अश्रु गिरे थे, जिससे बिंदु सरोवर का निर्माण हुआ था। साथ ही पुष्कर्णी का निर्माण भी उन्हीं के चिंतन से हुआ था। बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पहले उनके गण भैरवनाथ के दर्शन को अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि काशी के कोतवाल अर्थात काल भैरव की अनुमति के बिना दर्शन का फल प्राप्त नहीं होता है। काशी को मोक्षदायिनी भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जो मनुष्य यहां शरीर त्यागता है वह सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि कई लोग काशी में अपने जीवन का अंतिम समय व्यतीत करते हैं। काशी में भगवान शिव ने स्वयं ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर इसे विश्वनाथ कहा — अर्थात "संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी"। 1194 ईस्वी में मोहम्मद गौरी के सेनापति कुतुब-उद्दीन ऐबक ने पहली बार मंदिर को लूटा और तोड़ा। 1585 ईस्वी. :में अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। 1669 ईस्वी:में औरंगज़ेब ने पुनः मंदिर को ध्वस्त कर वहाँ ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवाया। यह मस्जिद आज भी मंदिर परिसर के बगल में स्थित है। "ज्ञानवापी" का अर्थ है ज्ञान की कुआँ। ऐसी मान्यता है कि जब मंदिर को नष्ट किया गया, तो पुजारियों ने शिवलिंग को इसी कुएँ में छिपा दिया ताकि वह अपवित्र न हो 1780 ईस्वी में महारानी अहिल्याबाई होल्कर (इंदौर की रानी) ने वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया। यह मंदिर द्रविड़ शैली में बना है। 1835 ईस्वी में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को स्वर्ण मंडित करवाया — यह आज भी मंदिर की पहचान है। 2021 में नया अध्याय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया, जिससे मंदिर तक पहुंचना आसान हुआ और आस-पास के पुराने घाटों व मंदिरों का भी संरक्षण किया गया। वाराणसी में 80 से अधिक घाट हैं, जो गंगा नदी के किनारे स्थित हैं। इन घाटों का धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। दशाश्वमेध घाट: सबसे प्रसिद्ध घाट, यहीं प्रतिदिन गंगा आरती होती है। मणिकर्णिका घाट: प्रमुख श्मशान घाट है जहाँ मोक्ष प्राप्ति का स्थान माना जाता है। अस्सी घाट: युवाओं, साधुओं और पर्यटकों का केंद्र है हरिश्चंद्र घाट: दूसरा प्रमुख श्मशान घाट,है राजा हरिश्चंद्र से जुड़ा है हर घाट की अपनी पौराणिक कथा, तांत्रिक महत्ता और स्थानीय परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि काशी में मृत्यु होने से मोक्ष प्राप्त होता है — इसीलिए लाखों लोग यहां अंतिम संस्कार कराना चाहते हैं। काशी को तीनों लोकों में श्रेष्ठ माना गया है — स्वर्ग, मृत्युलोक और पाताल। यहाँ शिव, शक्ति, विष्णु, गणेश, सूर्य आदि सभी देवताओं के प्रमुख मंदिर हैं। संन्यासियों और तांत्रिकों के लिए यह तप का स्थान है। गंगा आरती, सप्तऋषि पूजा, महाशिवरात्रि, और देव दीपावली जैसे पर्व यहां अत्यंत भव्य रूप में मनाए जाते हैं। "काशी केवल एक शहर नहीं है — यह एक अनुभूति है, एक विश्वास है, और एक अनंत यात्रा का केंद्र है। यहाँ समय ठहर जाता है, और आत्मा शिव में विलीन हो जाती है। हर हर महादेव!" #ai #shiva #ancient #travel #hindutemple #sanatandharma #jyotirling #ytshorts #youtube #banaras #gangaaarti #spritual #spritualindia #vlogs #viralvideo #kashiviswanath #varanasi kedarnath jyotirlinga    • Kedarnath Dham: #kedharnath #jyotirling #y...   Mahakaleshwar jyotirling    • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रहस्य | जो हर ...   आप जानना चाहते हैं — काशी का आध्यात्मिक रहस्य? काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का इतिहास? गंगा आरती की अद्भुत अनुभूति?