प्रस्तुति : भागीरथी रिकार्डिग स्टूडियो स्वर:रामचन्द्र चमोली कु0आरती चमोली संगीत :फौजी दिदा रामसिंह राणा जी कैमरा : फौजी दिदा संम्पादक : फौजी दिदा सहयोग : अंकित रावत व पवन अलियाटा सुटिंग स्थल :ग्राम बनाड़ी, गर्ता गांव, सिरा गांव,लुणसु ,इडालस्यूं, खट जौनपुर, बागी, निर्माता : रूद्राक्ष राणा दोस्तों जय बद्रीविशाल हम अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हर समय कोसिस करते रहते हैं हमारे पौराणिक देवस्थान, देव डाेलियों, जैसे त्यौहार को आपके समुख प्रस्तुत करना हमारा कर्तव्य है ।दुल्हा देवता ये सिरा गांव हातड़ पटटी उतरकाशी जिले में जन्मे थे उन्होंने अपनी मां से कहा था मां मैं सिखार खेलने ऊपर डांडा (ऊचें सिखर पहाड़) जा रहा हूँ तो मां ने बहुत मना किया पर वे न माने वे हीरन के पीछे आखेट करते करते दूर बुरांस के जंगलों में चले गये जहां बर्फ भी पड़ी थी उन्होनें हीरन को मारने के लिए गोली चलाई पर वह एक हीरन का 7 हीरन बन गये और उसी समय उस व्यक्ति को परियां हर कर इन्द्र लोक ले गई वह मर गया गांव में सोक छा गया उसकी माँ तड़फने लगी, वह अपने मां के सपने में आया मां तू चिन्ता न करना मैं तेरा हर काम करते रहूंगा वह अपनी माँ का सारा काम करता ।मां को लगा कि जब यह मेरा सब काम करता है तो मुझे इसको गले लगाना चाहिए, यह कार्रवाई कई बर्षों चलती रही मां ने कहा कि मैं आज छुप कर इसको पकडूगीं वह कडीं (घिल्डा) के नीचे छुप गयी जैसे उसकी अात्मा आई मां ने उसे पकड़ कर गले लगा दिया उसने कहा मां तूने गलती कर दी अब मैं स्वर्ग लोक गया अब मैं दुबारा नहीं आऊगां ।वह गायब हो गया और दूल्हा देबता महाराज के रूप में आज इस क्षेत्र में विख्यात है । दोस्तों हम आपके लिए नये नये गीत लेकर आते हैं आप चैनल को सस्कराईब करना न भूलें ।जय बद्रीविशाल ।