राधा का असली जन्मस्थान कहां है | Radha ka Asali Janmsthan kaha hai Barsana ya Raval | Radha ashtami मथुरा. कान्हा के जन्म यानि जन्माष्टमी के 16 दिन बाद मथुरा में एक बार फिर उत्सव का माहौल है। यहां धूमधाम से नन्दाष्टमी मनाई जा रही है। ऐसे में dainikbhaskar.com राधारानी के जन्मस्थान के बारे में बताने जा रहा है। कृष्ण के हृदय में वास करने वाली राधारानी बरसाना में पली-बढ़ी थीं, लेकिन उनका जन्म यहां से 50 किमी दूर रावल गांव में हुआ था। मान्यता है कि यहां स्थापित मंदिर के ठीक सामने एक बगीचा है, जहां आज भी राधा-कृष्ण पेड़ के रूप में मौजूद हैं। पेड़ स्वरूप में हैं राधा और श्याम रावल गांव में स्थापित राधारानी के मंदिर के ठीक सामने प्राचीन बगीचा है। कहा जाता है कि यहां पर पेड़ स्वरूप में आज भी राधा और कृष्ण मौजूद हैं। यहां पर एक साथ दो पेड़ हैं। एक श्वेत है तो दूसरा श्याम रंग का। इसकी रोज पूजा होती है। मंदिर के पुजारी ललित मोहन कहते हैं कि राधा और कृष्ण पेड़ स्वरूप में आज भी यहां से यमुना जी को निहारते हैं। कमल के फूल में मिलीं राधारानी श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। रातोंरात उन्हें गोकुल में नंदबाबा के घर पहुंचाया गया। कंस के डर से उस वक्त कृष्ण का जन्मोत्सव नहीं मनाया गया। 11 महीने बाद नंदबाबा ने सभी जगह संदेश भेजा और कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। गोकुल के राजा वृषभान जी भी बधाई लेकर गोकुल पहुंचे। उनकी गोद में राधारानी भी थीं। वहां बैठते ही राधारानी घुटने के बल चलते हुए बालकृष्ण के पास पहुंची और तभी उन्होंने अपने नेत्र खोल दिए।