दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़पों को टाला भी जा सकता था। मौक़े पर यदि पुलिस अधिकारी समझदारी का परिचय देते तो यह स्थिति ही पैदा नहीं होती, जो हुई। हालात यहाँ तक पहुँच गए कि वकील और पुलिस दोनों ही हड़ताल पर चले गए। गृह मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, तब उप राज्यपाल सक्रिय हुए और हड़ताली पुलिसकर्मियों को समझाने की कोशिशें शुरू की गई। गलती दोनों तरफ़ से ही हुई है लेकिन जिस तरह वकीलों को वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करते हुए देखा गया, वह बेहद अफ़सोस जनक और आपत्तिजनक है। किसी को भी सरकारी ड्यूटी पर तैनात किसी कर्मचारी के साथ इस तरह की हरकत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की ही जानी चाहिए, जिन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी क़ानून को हाथ में लेने की कोशिश की। इसी से हालात पेचीदा होते चले गए। इस हिंसा और टकराव के मूल को भी समझने की ज़रूरत है ताकि आगे इसकी पुनरावृत्ति न हो। ------- Follow me / omkarchaudhary / omkarchaudhary / omkar_chaudhary.editor ------- #lawyersanddelhipolice #homeministeramitshah #lieutenantgovernoranilbaijal