4 भारतीय खिलाड़ी जिनका 2019 विश्व कप में खेलने का सपना टूट सकता है दोस्तों राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट, आयरलैंड के खिलाफ टी-20 श्रृंखला और इंग्लैंड दौरे में एकदिवसीय श्रृंखला के लिए भारतीय टीम का चयन किया है. इनमें से एकदिवसीय टीम चयन सबसे महत्वपूर्ण था क्योंकि 2019 विश्वकप के लिए अभी सिर्फ 1 साल रह गया है. ऐसे में हर श्रंखला महत्वपूर्ण हो जाती है. इसके अलावा 2019 विश्व कप की मेजबानी भी इंग्लैंड ही करेगा. इसलिए यह श्रंखला और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. हालांकि टीम का चयन उम्मीद के मुताबिक ही किया गया है लेकिन वनडे टीम से कुछ बड़े नाम गायब है और ऐसा होने से इन खिलाड़ियों के विश्व कप में खेलने पर एक प्रश्न चिन्ह लग गया है. आइए जानते हैं ऐसे 4 खिलाड़ियों के बारे में जिनका विश्वकप में खेलने का सपना शायद पूरा ना हो सके. 4. मोहम्मद शमी मोहम्मद शमी ने विश्वकप 2015 में भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस तेज गेंदबाज के पास मैच की शुरुआत में ही विरोधी बल्लेबाज पर दबाव बनाकर विकेट लेने की क्षमता है. दुर्भाग्य से उनका प्रदर्शन विश्व कप के बाद से ही गिरता चला गया और दूसरे गेंदबाजों जैसे भुवनेश्वर और जसप्रीत बुमराह ने अपने प्रदर्शन मे लगातार सुधार किया है. इसके अलावा शमी कई श्रंखलाएं चोट की वजह से नहीं खेल पाए और जिन मैचों में खेले काफी रन लुटाए ऐसा लगता है की चयनकर्ता चाहते हैं कि शमी टेस्ट क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करें क्योंकि गेंदबाजी की उनकी शैली क्रिकेट के बड़े प्रारूप के लिए अधिक उपयुक्त बनाती हैं. इसके अलावा भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह के साथ साथ उमेश यादव की बेहतरीन फॉर्म में नजर आ रहे हैं. ऐसे मे शमी का भारत की वनडे टीम का हिस्सा बनना लगभग नामुमकिन सा लगता है. 3. मनीष पांडे 2015 में भारत के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले बल्लेबाज मनीष पांडे से भारतीय टीम को बहुत उम्मीदें थी. घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उन्हें भारतीय टीम में शामिल किया गया था लेकिन लंबे समय तक बाहर बैठने के बाद पांडे ने आखिरकार 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाकर अपने क्षमता का परिचय दिया था. अपने शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम प्रबंधन ने मध्यक्रम को मजबूती प्रदान करने की जिम्मेदारी दी. लेकिन दुर्भाग्य से वे उम्मीदों पर खरा उतरने मे नाकाम रहे. पांडे ने अक्सर गैरजिम्मेदार शॉट खेलकर अपना विकेट गवाया. जिसका खामियाजा पूरी टीम को चुकाना पड़ा और चयनकर्ताओं ने उन्हें एकदिवसीय टीम से बाहर कर दिया. अब श्रेश अय्यर, अंबाती रायडू ,ऋषभ पंत, संजू सैमसन जैसे मजबूत विकल्पों की वजह से पाण्डेय का भारतीय टीम में चुना जाना नामुमकिन सा लगता है. 2. रविंद्र जडेजा ऑलराउंडर की भूमिका के लिए विभिन्न खिलाड़ियों को आजमाने के बाद भारतीय टीम प्रबंधन ने रविंद्र जडेजा पर भरोसा जताया था. जडेजा की अच्छी बल्लेबाजी तकनीक और धारदार गेंदबाजी के चलते उन्हें टीम में शामिल किया गया था लेकिन हार्दिक पांड्या के टीम में आ जाने से जडेजा टीम से बाहर हो गए हैं. इसके साथ ही गेंदबाजी में भी वह बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने मे नाकाम रहे हैं. चैंपियन ट्रॉफी 2017 में उनके निराशाजनक प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को अन्य विकल्पों को तलाशने पर मजबूर कर दिया था. इसके अलावा गेंदबाजी में युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के लगातार अच्छे प्रदर्शन से जडेजा को टीम में वापसी के लिए और इंतजार करना होगा. 1. रविचंद्रन अश्विन रविचंद्रन अश्विन इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय टीम में चयन ना होने से सबसे ज्यादा निराश होंगे. वो देश के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक है लेकिन उनका हालिया प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं रहा है. चैंपियन ट्रॉफी से खराब फॉर्म में चल रहे अश्विन पर युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव जैसे युवा स्पिनरो को ज्यादा प्राथमिकता दी गई है और इन दोनों ने अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है. चयनकर्ताओं ने श्रंखला के लिए ऑफ स्पिनर का चयन करने का फैसला किया था और उन्होंने अनुभवी अश्विन की बजाय युवा वाशिंगटन सुंदर का चयन किया. ऐसे में जब विश्वकप में सिर्फ 1 साल का समय रह गया है तो अश्विन का भारतीय एक दिवसीय टीम मे वापसी करना बहुत मुश्किल लगता है.