Guru मुक्तिदाता aur Margdarshak!# स्वयंभू और नकली गुरु पहचानो

Guru मुक्तिदाता aur Margdarshak!# स्वयंभू और नकली गुरु पहचानो

Shakti Jagane ke liye kya karen सिद्धयोग शक्ति दरबार के पीठाधीश्वर श्री गोविंदजी महाराज महान उद्धारक संत हैं जो अपनी साधना पद्धति-'ध्यान',मंत्र जप,हवन द्वारा हज़ारों नर नारियों को साधना पथ में आगे बढ़ा चुके हैं ।साधना करने के इच्छुक व्यक्तियों को शक्तिपात देकर बहुत कम समय में उच्चकोटि के अनुभव करा रहे हैं,हंसना,रोना,दिव्य ज्योति दर्शन,अनहत नाद, नीला प्रकाश,सूक्ष्म शरीर का अनुभव बहुत साधकों को हो गया।सिद्धगुरु श्री गोविन्दजी का कहना है कि कोई व्यक्ति बुरा या भला हो इससे कोई फर्क नही पड़ता वह मनुष्य है उसमें आत्मा रूपी परमात्मा का वास है।अतः वह किसी व्यक्ति में भेद न करके सभी को जाग्रत मंत्र दे देते हैं ताकि उनका कल्याण हो सके ।जो परम गुप्त विद्याओं के मंत्र हैं जिन्हें प्राचीन काल से ऋषि-मुनियों द्वारा गुप्त रखा गया उन मन्त्रों को भी वह सहज में देते रहे हैं ।आपका कहना है कि आत्मज्ञान के सभी अधिकारी हैं ,बस उसको जानने और साधना करने की परम जिज्ञासा और कर्मठता होनी चाहिए ।जो लोग जितना करेंगे,उतना उनको इसी जीवन में प्राप्त हो जाएगा,अन्यथा अगले जन्म में उन्हें गुरु तलाशना नही पड़ेगा और आगे का योग स्वयं शक्ति कराएगी...💐💐 पूज्य गुरुदेव श्री गोविन्दजी महाराज ने मंत्र - तंत्र ,योग, ज्योतिष तथा ध्यान की सभी विधाओं का जो विशिष्ट और उच्चकोटि का ज्ञान प्राप्त किया है उसे सभी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह channel बनाया है ।दस महाविद्याओं के जाग्रत स्वरूप श्री गोविंदजी 18 वर्ष की आयु में ही ईश्वर ज्ञान के प्रति अति जिज्ञासु होकर तमाम साधु-संत, महात्माओं और अनेक तांत्रिकों, ज्योतिषियों,अघोरी के सम्पर्क में आते गए ।आपकी सहजता से सभी प्रभावित होकर ऐसा ज्ञान दे देते जो सबसे छुपाये रहते थे।युवावस्था में ही इन्होंने तमाम चमत्कारी विधाओं:- हवा में हाथ हिलाकर मनवांछित वस्तु मंगाना, दूसरे के मन की बात पढ़ लेना,मंत्रो द्वारा हवनकुंड में अग्नि प्रकट कर देना आदि अनेकानेक विधाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था पर प्यास अभी नहीं बुझी थी:-ईश्वर किस रूप में कहाँ मिलेंगे...एक बात स्पष्ट हो गई कि सभी विधाओं से श्रेष्ठ "आत्मज्ञान" है जिसके होने पर सब ज्ञान खुल जाता है, फिर कुछ नही बचता। परमपूज्य गुरुदेव गोविंदजी ने माँ बगलामुखी,माँ काली,माँ संतोषी,माँ सरस्वती,माँ लक्ष्मी(श्री विद्या) और शिव के बालरूप बाबा बटुकनाथ की शक्तियों को सहज में ही पा लिया तभी ज्ञानगंज के महातपस्वी तेजोमयी दिव्य रूप महावतार बाबाजी का उत्तराखंड के वन में(रानीखेत के पास)आने का संदेश दिया वहां उन्होंने ब्रह्मांड की समस्त शक्तियों का समावेश पूज्य गुरुदेव में जाग्रत रूप में कर दिया और वचन लिया कि किसी शुल्क से इसे दूर रखना जगत का कल्याण करना।पूज्यश्री आडम्बर और दिखावे को मना करते हैं :- शक्तिपात सिद्ध व सभी मंत्रों को जाग्रत करने की सामर्थ्य रखते हैं अनिष्टकारी छोटी सिद्धि वाले इनके पास आने मात्र से संकुचित हो जाते हैं आपके पास आने मात्र से शुद्ध हो जाते हैं..💐💐 परमपूज्य श्री गोविन्दजी महान सिद्धयोगी हैं जिनके पास आने पर ही शक्ति की तरंगों का आनन्द महसूस होने लगता है.. सिद्धयोग ऐसा योग है जिसमें सभी साधनाएं समाविष्ट हैं,अलग से कर्मकांड-हठयोग-राजयोग-सांख्य योग-ज्ञानयोग-कर्मयोग-भक्तियोग-प्रेमयोग और अन्य किसी भी प्रकार की साधना की आवश्यकता नहीं है सिद्धयोग ऐसा महासागर है जिसमें सब कुछ प्राप्त हो जाता है और जिस साधक को जिस योग की जरूरत है वही उनके शरीर में क्रियाएँ होने लगेंगी।धीरे धीरे शरीर की 72000 नाड़ियों का शोधन होकर सातों चक्रों में गति होती है और कुण्डलिनी जाग्रत हो जाती है...💐💐 whatsapp:- 8445223399