चातुर्मास में क्या करें और क्या ना करें, कैसे रहें, शुभ मुहूर्त, उपाय, नियम chaturmas special month

चातुर्मास में क्या करें और क्या ना करें, कैसे रहें, शुभ मुहूर्त, उपाय, नियम chaturmas special month

#चतुर्मास #chardham #गोदान चातुर्मास के दौरान क्या करें चातुर्मास में क्या ना करें चातुर्मास का महत्व क्या है, आईए जानते हैं, 29 जून से चातुर्मास की शुरुआत हो चुकी है और 23 नवंबर को खत्म होगा। देवशयनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा के लिए चले जाते हैं, तब से ही चार्तुमास का प्रारंभ हो जाता है ।और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन चातुर्मास का समापन होता है। चातुर्मास चार महीनों का होता है लेकिन सावन मास में मलमास या पुरुषोत्तम मास की पड़ने की वजह से इस बार चातुर्मास पांच महीनों का होगा। इन पांच महीनों में शादी विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश आदि शुभ व मांगलिक कार्यक्रमों पर रोक लग जाती है। आइए जानते हैं चातुर्मास का महत्व और चातुर्मास में क्या करें और क्या ना करें... चातुर्मास में क्या करें ? भगवान विष्णु और शिव की करें उपासना प्रतिदिन सुबह और शाम को विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें या ॐ नमोः नारायणाय, ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र की रोज एक माला सुबह और शाम को जपें। इसी तरह शिवजी की उपासना भी करें। इस समय सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करना चाहिए। साथ ही पांच तरह के दान का विशेष महत्व होता है, पहला- अन्न दान, दूसरा- दीपदान, तीसरा- वस्त्रदान, चौथा- छाया दान और पांचवा- श्रमदान करना चाहिए। चातुर्मास में ब्रजधाम की यात्रा करना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि चातुर्मास में सभी तीर्थ ब्रजधाम आते हैं। अब चलिए जान लेते हैं कि चातुर्मास में क्या नहीं करें ? चातुर्मास में विवाह संस्कार, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुभ व मांगिलक कार्यक्रम नहीं किए जाते। पलंग व बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। साथ ही किसी प्रकार का क्रोध ना करें और संयम का पालन करें। चातुर्मास में ब्रजधाम को छोड़कर अन्य जगहों की यात्रा नहीं करनी चाहिए। बाल व दाढ़ी, नाखून नहीं कटवानी चाहिए। इस समय कटु वचन, झूठ बोलना, अनर्गल बातें का त्याग करना चाहिए। चातुर्मास में तेल से बनी चीजें, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, मसालेदार भोजन, प्याज, लहसून,अचार, बेल, मूली, दूध, दही, शक्कर, मिठाई, सुपारी, मांस मदिरा आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इस चार माह के दौरान सात्विक भोजन ही खाना चाहिए। चार माह में से कम से कम दो माह एक ही स्थान पर रहना चाहिए। साथ ही कपड़े व आभूषण नहीं खरीदने चाहिए। चातुर्मास का महत्व अब चलिए जान लेते हैं महत्व क्या है? चातुर्मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इस मास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है । ध्यान व साधना करने वालों के लिए चातुर्मास का विशेष महत्व है। चातुर्मास में विष्णु सहस्रनाम और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। तो यही सब कुछ है कि, चतुर्मास के समय आपको करना है। वीडियो मे जानकारी अच्छी लगी हो तो लाईक सबस्क्राइब जरूर करें, धन्यवाद।