● तुम पतवार ● (कसक भरी कविता) एक ऐसी चीज, जिस पर किसी का बस नहीं. बड़े बड़े संयमी, विग्रही, बैरागी बात करते रह गए. लेकिन इसके कहर से कोई न बच पाया. ऐसी ही शै है दिल, वो जो करवा दे, कम है. फिर एक समय ऐसा आता है जब दिल तो होता है लेकिन खुशदिल कहीं नहीं होता. आज इन्ही भावों को समेटे हुए मेरी डायरी के पुराने पन्नों से निकली एक कसक भरी कविता ● तुम पतवार ● इस वीडियो में सुनिये.. [पसंद आने पर वीडियो को लाइक करने के साथ नीचे कमेंट भी लिखिए, और मेरे यूट्यूब चैनल #MeriKalam को सब्सक्राइब भी कीजिये] ★ Share - Subscribe - Support ★ This Video: • तुम पतवार | कसक भरी कविता | Adhoora Prem |... Meri Kalam: / @merikalam Language: Hindi-Urdu | हिंदी-उर्दू