Rovan Aalee Kyon Rove ke vipda padgee tere main

Rovan Aalee Kyon Rove ke vipda padgee tere main

Saang / Kissa : Raja Veer Vikramajeet. (Mangeram Kissa) Ragni : rovan aalee kyon rove, ke vipada padegee tere mein, gaira ke dukh door karaneeya ya taakat se mere mein। रोवण आली क्यों रोवे, के विपदा पड़ेगी तेरे में, गैरा के दुख दूर करणीया या ताकत से मेरे में। वीर विक्रमाजीत के किस्से की कहानी : राजा वीर विक्रमाजीत के किस्से में मानसरोवर झील में हंसों का बसेरा था। इंद्र देवता ने उन्हें 12 वर्ष का देश निकाला दे दिया। हंस उज्जैन के राजा वीर विक्रमाजीत की शरण में पहुंच गए। 11 वर्ष 11 महीने काटने के बाद हंस वापिस वतन लौट रहे थे तो इंद्र देवता ने उनकी एक हंसनी कैद कर ली। निराश होकर हंस फिर राजा वीर विक्रमाजीत के पास फरियाद लेकर पहुंचे। राजा हंसों की मदद के लिए चल पड़ता है। रास्ते में जब वह एक सराय में विश्राम करता है तो सराय की संचालक को रोते देख उसकी दास्तां सुनता है। राजा को पता चलता है कि इस क्षेत्र के राजा शामधाम की पुत्री रत्‍‌न कौर हर रोज एक व्यक्ति को मौत का ग्रास बनाती है। आज सराय संचालक के पुत्र की बारी है। वीर विक्रमाजीत खुद रत्‍‌न कौर के पास जाता है। रात को रत्‍‌न कौर के मुख से सर्प निकलकर जब राजा की ओर लपकता है तो राजा तलवार से उसके टुकड़े-टुकड़े कर देता है। राजा शामधाम वीर विक्रमाजीत के साथ अपनी पुत्री की शादी कर आधा राज्य दे देता है। इसी दौरान वीर विक्रमाजीत की मुलाकात इंद्र के अखाड़े से पृथ्वी लोक पर घूमने आई खांडेराव परी से होती है। विक्रमाजीत खांडेराव परी के साथ इंद्र के अखाड़े में पहुंचते हैं। जहां तबला वादक की तबियत खराब होने पर वह खुद तबला बजाकर अपने दादा इंद्र देव को खुश करते हैं। खुश होकर इंद्र उन्हें वरदान मांगने को कहते हैं। जहां विक्रमाजीत हंसनी को लेकर वापिस हंसों को सौंपकर अपना दायित्व निभाता है। राजा वीर विक्रमाजीत इंद्र के पुत्र गंधर्वसैन के पुत्र थे। उन पर भगवान शिव की कृपा थी।