SitaRam Ji ki Pyari Rajdhani Laage - सीतारामजी की प्यारी रजधानी लागे (सीताराम जी का सुन्दर भजन)

SitaRam Ji ki Pyari Rajdhani Laage - सीतारामजी की प्यारी रजधानी लागे (सीताराम जी का सुन्दर भजन)

।। राधे राधे।। तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए। अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए।। परमपूज्य सियाराम भक्त तुलसीदास भावार्थ - एक भरोसा प्रभु श्री राम का है जिसे पाने के बाद मन संसार से निश्चिंत हो कर, निर्भय हो कर रहता है। जो कुछ भी होना है वह तो हो कर ही रहता है उसे कोई रोक या पलट नहीं सकता। परन्तु केवल एक हरी नाम के भरोसे रहने वालों को अनहोनी तो कभी छू ही नहीं सकती, इसका प्रमाण सच्चा भक्त स्वयं ही जान जाता है क्योंकि भक्त ही सत्य को देख पाता है और मायाजनित बुद्धि वाला संसार तो कुछ और ही देखता है। *********************************************************************** संत भगवान् तुलसीदास जी का भाव यह है की आप प्रभु पर और प्रभु के नाम पर अपने विश्वास को दृढ़ रखिये और इसका चमत्कार आप स्वयं देखें। वैसे भी इस संसार में दूसरा कोई भरोसा तो है ही नहीं, दूसरों पर विश्वास करके हमने सदैव ही धोखा और दुःख पाया है और स्वयं का सामर्थ तो एक माया रचित मिथ्या है, क्योंकि "मै" (अहंकार) पर विश्वास करके भी हम अनंत जन्मो से इस संसार की झूठी मृग तृष्णा में भटक ही रहे है। भरोसा तो केवल गुरु - हरी का ही सच्चा है बाकि सब तो केवल मिथ्या ही है। एक आस, एक भरोसा, एक विश्वास केवल हरी नाम का। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।। *********************************************************************** नमो नमो गुरु कृपा निधान। श्री राधा वल्लभो जयति। श्री हरिवंश चंद्रो जयति। ।। राधे राधे।।