गरीब की दशहरे की कहानियाँ | Dussehra Ki Kahaniyan | Hindi Kahani

गरीब की दशहरे की कहानियाँ | Dussehra Ki Kahaniyan | Hindi Kahani

इस वीडियो में तीन प्रेरणादायक कहानियाँ हैं जो बताती हैं कि अच्छाई और ईमानदारी की जीत हमेशा होती है। वीडियो का सारांश (Summary of the Video) इस वीडियो में मुख्य रूप से तीन कहानियाँ बताई गई हैं: 1. रमेश, खिलौने वाला और राम जी की कृपा यह कहानी रमेश (रमेश) नाम के एक गरीब खिलौने बेचने वाले की है, जो अपनी पत्नी उमा और बेटी रूही के साथ रहता है [00:27]। दशहरे की उम्मीद: रमेश और उमा को दशहरे के मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि यह उनकी साल भर की कमाई का मुख्य ज़रिया होता है। वे रात भर जागकर सुंदर खिलौने बनाते हैं [02:45]। मुश्किलें: मेले के बाहर बड़ी दुकानें लग जाने के कारण रमेश को अपनी जगह से हटना पड़ता है [04:22]। उसी दौरान एक दुर्घटना में रमेश घायल हो जाता है और उसे अस्पताल ले जाना पड़ता है [04:55]। चमत्कार: उमा अकेले खिलौने बेचने की कोशिश करती है, लेकिन निराशा हाथ लगती है। तब वह भगवान राम से प्रार्थना करती है [05:35]। उसकी पुकार सुनकर भगवान राम हनुमान जी को पृथ्वी लोक पर भेजते हैं [06:10]। एक लड़का (जो वास्तव में हनुमान जी द्वारा भेजा गया था) आता है और उमा को सभी खिलौनों का एक बड़ा ऑर्डर देता है, साथ ही एडवांस पेमेंट भी करता है [07:03]। विजय: बाद में पता चलता है कि वह लड़का राम मंदिर के पुजारी जी के कहने पर नहीं, बल्कि सीधे हनुमान जी की कृपा से आया था [09:16]। इस घटना के बाद, एक व्यापारी रमेश और उमा की ईमानदारी और कला से खुश होकर उन्हें खिलौनों की फैक्ट्री खोलने में मदद करता है। इस तरह, भगवान के आशीर्वाद से उनके दुखों का निवारण होता है [09:53]। 2. कठपुतली कलाकार पंकज और सुमित का घमंड तोड़ना यह कहानी पंकज (Pankaj) और सुमित (Sumit) की है, जो रामलीला में अभिनय करते हैं, और घमंडी सेठ कांता प्रसाद (Kanta Prasad) की। अन्याय: पंकज के चोट लगने के बाद, कांता प्रसाद उसे काम से निकाल देता है। सुमित, पंकज का पक्ष लेने पर, वह भी काम से निकाल दिया जाता है [13:07]। सेठ को अपनी रामलीला पर बहुत घमंड होता है। नया रास्ता: पंकज और सुमित हार नहीं मानते और अपनी पुरानी कठपुतली रामलीला (Puppet Ramlila) को फिर से शुरू करते हैं [14:49]। वे एक बोर्ड लगाते हैं कि लोग टिकट के पैसे तभी दें जब उन्हें रामलीला पसंद आए [15:26]। उनका शो हिट हो जाता है और लोग बड़ी संख्या में इसे देखने आते हैं [15:50]। अच्छाई की जीत: कांता प्रसाद ईर्ष्या में आकर उनका स्टेज तुड़वा देता है [16:08]। फिर भी, पंकज और सुमित हिम्मत नहीं हारते और बैलगाड़ी पर टेंट लगाकर गाँव-गाँव में शो करना शुरू कर देते हैं [16:37]। जल्द ही उन्हें शहर में शो करने का मौका मिलता है [17:43]। सेठ की हार: अंत में, कांता प्रसाद उनसे मिलता है और टूट जाता है। वह अपना घमंड टूटने की बात स्वीकार करता है। पंकज और सुमित उसे माफ करते हैं और उसकी मदद करने का वादा करते हैं [18:47]। 3. राधा, दुर्गा भक्त और हार की चोरी यह कहानी मनोहर (Manohar) धोबी की बेटी राधा (Radha) और साहूकार की पत्नी मनोरमा (Manorma) की है। आरोप: राधा, जो दुर्गा माँ की भक्त है और नवरात्रि का व्रत कर रही है, साहूकार लक्ष्मीचंद के घर से कपड़े लेने जाती है [21:44]। बाद में, मनोरमा का सोने का हार गुम हो जाता है और वह राधा पर चोरी का झूठा इल्जाम लगाती है [23:02]। देवी का हस्तक्षेप: पुलिस राधा को गिरफ्तार कर लेती है [23:37]। जेल में राधा माँ दुर्गा से प्रार्थना करती है। आधी रात को, माँ दुर्गा मनोरमा को सपने में आकर बताती हैं कि राधा निर्दोष है और हार चुराने वाली उनकी नौकरानी कमला (Kamla) है [25:12]। न्याय: मनोरमा और लक्ष्मीचंद तुरंत पुलिस स्टेशन जाकर राधा को छुड़वाते हैं और उससे माफ़ी मांगते हैं [26:05]। अगले दिन, कमला अपनी गलती मानती है और राधा की दयालुता से मनोरमा भी उसे माफ़ कर देती है [27:12]। इस प्रकार, माँ दुर्गा की कृपा से राधा की ईमानदारी साबित होती है।