🙏 कार्तिक मास का हर अध्याय हमें जीवन की किसी न किसी सच्चाई से जोड़ता है। अध्याय 35 में बताया गया है — पाप क्या है, पुण्य क्या है, और कैसे हमारे कर्म ही हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। इस कथा में यह स्पष्ट होता है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में भगवान विष्णु और महादेव की भक्ति करता है, दान, दीपदान, स्नान, जप-तप करता है — वह अपने पापों को नष्ट कर अपार पुण्य का अधिकारी बनता है। 🌸 📖 इस अध्याय से हमें यही सीख मिलती है — “पाप से विमुक्ति का मार्ग केवल भक्ति और सच्चे कर्मों से ही संभव है।” 🎧 पूरी कथा सुनिए “Radheshyam Ki Diwani” चैनल पर — जहाँ हर दिन कार्तिक मास की दिव्य कथाएँ, भगवान की महिमा और भक्ति का संदेश लेकर आती हैं। 🌿 जय श्रीहरि ✨ हर हर महादेव 🙏