सियासी जमीन के लिए पायलट की उड़ान:ताकत दिखाने के लिए प्रदेश भर में किसान सम्मेलन किया पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट; भाजपा के बहाने गहलोत और आलाकमान को भी दिया संदेश सचिन पायलट अब प्रदेश भर में किसान सम्मेलन करेंगे।राजस्थान की राजनीति में सीएम अशोक गहलोत के सामने कमजोर नजर आ रहे सचिन पायलट एक बार फिर से सियासी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। पायलट अब प्रदेश भर में किसान सम्मेलन करेंगे। दौसा से इसकी शुरुआत किया इसके बाद 9 फरवरी को भरतपुर के बयाना और फिर 17 फरवरी को चाकसू क्षेत्र के कोटखावदा में पायलट की सभा होगी। इसमें बीजेपी के विरोध के बहाने पायलट शक्ति प्रदर्शन करके गहलोत और पार्टी आलाकमान को संदेश देना चाहते हैं कि राजस्थान की राजनीति में उनकी सियासी जमीन अभी कमजोर नहीं हुई है।जनाधार को फिर से रिचार्ज करेंगे पायलट इसके अलावा, किसान सम्मेलन के जरिए पायलट जमीनी जनाधार को रिचार्ज करेंगे। बताया जा रहा है कि पायलट के सियासी मित्रों ने उन्हें जयपुर से बाहर निकलकर फील्ड के दौरे करने की सलाह दी है। इसके बाद ही पायलट ने गांव-गांव दौरे करने और लोगों के बीच जाने की रणनीति बनाई।पहले सम्मेलन, फिर मुद्दे उठाएंगेइस रणनीति के पहले फेज में जहां पायलट किसान सम्मेलन करेंगे। वहीं, दूसरे फेज में लोगों की पॉपुलर डिमांड वाले मुद्दों को भी उठाएंगे। पहले फेज में उन जिलों में पायलट के दौरे होंगे जहां उनके समर्थक विधायक ज्यादा हैं। किसान सम्मेलन भी उन्हीं जिलों में रखे गए हैं। दौसा में पायलट समर्थक मुरारीलाल मीणा विधायक हैं, जहां आज से किसान सम्मेलन की शुरुआत हो गयी पायलट का दूसरा किसान सम्मेलन बयाना में हैं जहां उनके समर्थक अमरसिंह जाटव विधायक हैं और चाकसू में वेदप्रकाश सोलंकी विधायक हैं। ये तीनों विधायक बाड़ेबंदी में सचिन पायलट के साथ शामिल थे। मुरारीलाल मीणा ने कहा- महापंचायत में सब किसान समर्थक नेताओं को बुलाया पायलट समर्थक विधायक मुरारीलाल मीणा ने कहा कि दौसा की किसान महापंचायत में हमने सभी किसान समर्थक पार्टियों के नेताओं को बुलाया है। सचिन पायलट ने पहले से समय दे दिया है। हमने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ यह महापंचायत रखी है। इसका कोई सियासी मकसद नहीं है। मुरारीलाल मीणा के दावे के बावजूद इस किसान महापंचायत को राजनीतिक जानकार सचिन पायलट का शक्ति प्रदर्शन ही मान रहे हैं। जगन मॉडल के राजस्थान वर्जन पर सियासत करेंगे पायलट सचिन पायलट ने आंध्रप्रदेश में अपनाए गए जगनमोहन रेड्डी मॉडल को राजस्थान के हिसाब से मॉडिफाइड करके सियासत में आगे बढ़ने का फैसला किया है। जगन मॉडल के तहत फील्ड में लगातार सक्रिय रहना, सही मौकों पर ताकत दिखाना और विधायकों से लेकर ग्रासरूट स्तर तक अपने समर्थकों को हमेशा एक्टिव और उत्साहित रखना। बताया जाता है कि पिछले कई दिनों से सचिन पायलट ने अपने रणनीतिकारों के साथ इसे लेकर खूब ब्रेन स्टॉर्मिंग की है। फिलहाल जगन मॉडल के राजस्थान वर्जन पर पायलट आगे बढ़ेंगे। यह मॉडल कांग्रेस की टेंशन जरूर बढ़ाएगा। पायलट के शक्ति प्रदर्शन से गर्मा सकती है कांग्रेस की सियासत पायलट अब लगातार फील्ड के दौरे कर शक्ति प्रदर्शन करेंगे। पायलट के इस प्लान से कांग्रेस की अंदरूनी सियासत जरूर गर्माएगी। कांग्रेस में अशोक गहलोत खेमे के नेता यह मानकर चल रहे थे कि पायलट को सत्ता-संगठन से किनारे करके उन्हें कमजोर कर देंगे। हालिया घटनाओं से यह परसेप्शन बनाने का प्रयास भी किया गया। मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में लगातार देरी को सचिन पायलट खेमे को कमजोर करने की रणनीति से ही जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इतना तय है कि आने वाला समय कांग्रेस की अंदरूनी सियासत के लिहाज से भारी उठापटक वाला रहने वाला है।