हिंदी व्याकरण वर्ण विचार स्वर और व्यंजन की जानकारी

हिंदी व्याकरण वर्ण विचार स्वर और व्यंजन की जानकारी

वर्ण विचार स्वर और व्यंजन 'अ' को छोड़कर सभी स्वरों की मात्राएं होती है| स्वर रहित व्यंजन दिखाने के लिए हलंत ( ् ) का प्रयोग किया जाता है। व्यंजनों का उच्चारण सदा स्वरों की सहायता से होता है। 'ऋ' स्वर का उच्चारण 'रि' की भांति किया जाता है। 'ड़' और 'ढ़' का उच्चारण ड और ढ से भिन्न होता है। अतः उच्चारण के समय सावधान रहें; जैसे डमरु- लड़का ,मेंढक -पढ़ना आदि। ड़ और ढ़ से शब्द आरंभ नहीं होते। नुक्ता का प्रयोग अरबी फारसी शब्दों के साथ किया जाता है। चंद्र का प्रयोग अंग्रेजी शब्दों के साथ किया जाता है। मात्राएं (विशेष) 'र'के साथ उ/ऊ की मात्रा उसके बीच में (रु/रू) लगाई जाती है। 'ऋ' की मात्रा प्रायः व्यंजनों के नीचे लगाई जाती है। कुछ मात्राएं व्यंजनों के ऊपर ,कुछ साथ में तथा कुछ नीचे लगाई जाती हैं। अनुस्वार पंचम वर्ण के स्थान पर बिंदु के रूप में प्रयोग किया जाता है। जैसे संग, रंग आदि। अनुस्वार के बाद जो व्यंजन शब्द में लगा हो, उसी वर्ग के पंचम वर्ण को अनुस्वार के रूप में बोला या लिखा जाता है। कवर्ग कंघा(ड्)। तवर्ग संत (न्) टवर्ग खंडित (ण) पवर्ग रंभा (म) जब शिरोरेखा के ऊपर कोई मात्रा न हो तब चंद्रबिंदु का प्रयोग किया जाता है अन्यथा बिंदु का प्रयोग होता है; जैसे वहां- वहीं, कहां- कहीं आदि।