22 जनवरी 2022| दैनिक आहार - 287॥ Fr Joachim Lakra OP || Mark 3:20-21|| DMM

22 जनवरी 2022| दैनिक आहार - 287॥ Fr Joachim Lakra OP || Mark 3:20-21|| DMM

Thank you for visiting Satya ki Mashaal. This is a unit of Dominican Media Mission, India. This channel will provide you with Daily Gospel Reflections, Sunday Homilies, Talks, Devotional Hymns and many more - all in Hindi language. If you love to watch and hear it all in Hindi, you are at the right place. If you LIKE the videos, do SHARE them with others, and while you share, SUBSCRIBE the channel turning on the Notification Bell. प्रिय भाईयों एवं बहनों, समाज में या इस धरती में अलग होना उतना आसान नहीं है| अगर आप दूसरों से भिन्न हैं तो यह समझा जाता है कि आप में कुछ समस्या है| अगर आपके सोच-विचार, आपका नज़रिया दूसरों से अलग है, तो कहा जाता है कि आपका दिमागी हालत ठीक नहीं है| आपके मश्तिष्क के पुर्जों में कुछ त्रुटियाँ हैं या आपका ऊपरी हिस्सा हिल गया है| येसु ख्रीस्त भी बिलकुल अलग थे| उनका कार्य, उनकी बातचीत और उनका दृष्टिकोण उस समय के लोगों से बिलकुल भिन्न था| फरीसियों और सदूकियों से तो उनका सोच-विचार बिलकुल परे था| इसलिए आज के सुसमाचार में हम देखते हैं कि येसु के सम्बन्धियों में एक चिंता का विषय खड़ा हो गया है और वे येसु को बलपूर्वक पकड़ कर रखना चाहते हैं क्योंकि लोग यह कह रहे थे कि उन्हें अपनी सुध-बुध नहीं रही गयी है| अर्थात् वे पागल हो गये हैं| लोग ऐसा क्यों सोचते थे कि येसु पागल हो गये हैं? उसके कुछ कारण थे – सबसे पहला, लोगों के अनुसार येसु अपनी पारिवारिक व्यवसाय, बढ़ईगिरी को छोड़कर इधर-उधर बेवजह भटक रहे थे| उनके अनुसार इस तरह के सुरक्षित व्यवसाय को छोड़कर कोई पागल इंसान ही इधर-उधर घूमेगा| दूसरा, येसु कहीं भी किसी के सामने – चाहे वे सभागृह में याजकों के सामने या फरीसियों- सदूकियों, या नेताओं के सामने बेझिझक अधिकार के साथ बोलते थे| इस पागलपन का मतलब था अपने लिए खतरा मोलना| तीसरी बात, उनके इर्द-गिर्द अजीबो-गरीब शिष्यों की टोली थी जो उनके साथ आया-जाया करते थे; कोई मछुवारा था, तो कोई चुंगी वसूलने वाला, तो कोई कुछ और| इन्हीं सब कारणों से लोग उन्हें पागल समझते थे| निश्चय ही येसु सामान्य/साधारण (normal) तो नहीं थे, हम कह सकते हैं कि उनका दिमाग बिलकुल अलग था| वे पागल थे, लेकिन उनकी पागलपन का कारण क्या था? सिएना की संत कथरीना कहती हैं, “वे एक पागल-प्रेमी थे|” वे लोगों से बेहद प्यार करते थे| वही उनके पागलपन का कारण था कि वे स्वर्ग को छोड़कर इंसान बनकर धरती पर आये| चूँकि वे लोगों से अथाह प्रेम करते थे, लोग उनके आसपास हमेशा हुआ करते थे| लोगों के प्यार के खातिर ही वे उन्हें सत्य की शिक्षा देते थे और प्रेम और करुणा से पूरित होकर बीमारों को चंगा करते थे| उनके इस प्यार के लिए उन्हें पागल भी कहा जाए तो कोई हर्ज़ नहीं, क्योंकि लोगों को छुड़ाने के लिए, उनकी मुक्ति के लिए उसने न चुकाया हो ऐसा कोई क़र्ज़ नहीं| येसु के अनुयायी होने का मतलब है, उनकी तरह अलग बनना| इस दुनिया में अलग बनना, भिन्न पहचान बनाना उतना आसान नहीं है| उसके लिए जूनून और पागलपन की ज़रूरत है| येसु हमारे प्यार में पागल थे; आईये हम भी उन्हें पूरे दिल से प्यार करें और उनकी शिक्षा के अनुसार जीवन बितायें| आमेन | सत्य की मशाल चैनल पर आने के लिए धन्यवाद | डोमिनिकन मीडिया मिशन की इस इकाई पर आपके लिए हिन्दी भाषा में दैनिक सुसमाचार चिंतन, रविवारीय उपदेश, प्रवचन, भक्ति गीत और अन्य कार्यक्रम प्राप्त होगा | अपनी आध्यात्मिक पोषण के लिए इस चैनल को SUBSCRIBE करें, वीडियो पसंद आये तो LIKE करें , और दूसरों के साथ SHARE भी करें|