जब दुर्योधन ने अर्जुन-सुभद्रा के विवाह में डाली अड़चन और श्रीकृष्ण के गोविंद बनने की प्रेरक गाथा

जब दुर्योधन ने अर्जुन-सुभद्रा के विवाह में डाली अड़चन और श्रीकृष्ण के गोविंद बनने की प्रेरक गाथा

"रुक्मिणी सुभद्रा को अर्जुन से विवाह करने के लिए कहती है तो सुभद्रा बहुत खुश हो जाती है। श्री कृष्णा और रुक्मिणी दोनो के विवाह की बात करते हैं। श्री कृष्ण बलराम के आने के बाद सुभद्रा और अर्जुन के विवाह करने की बात श्री कृष्ण रुक्मिणी से कहते हैं। दुर्योधन की गदा युद्ध की शिक्षा समाप्त हो जाती है दुर्योधन बलराम को गुरुदक्षिणा देता है। बलराम दुर्योधन से प्रसन्न होकर उसे एक वरदान माँगने के लिए कहते हैं। दुर्योधन बलराम से वरदान माँगने में शर्म करते हुए चला जाता है तो शकुनि बलराम को बताता है की दुर्योधन की इच्छा आपकी बहन सुभद्रा से विवाह करे। शकुनि की बात सुन बलराम उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं। शकुनि और दुर्योधन बलराम को द्वारिका के लोगों के लिए भेंट देते हैं। बलराम वापस द्वारिका आ जाते हैं और कृष्ण को बताते हैं की सुभद्रा का रिश्ता मैं दुर्योधन के साथ कर आया हूँ। बलराम सुभद्रा को बताते है की उसके विवाह दुर्योधन के साथ तय कर आया हूँ तो सुभद्रा को ये सुनकर परेशान हो उठती है। एक दिन गाँव के लोग इंद्र पूजा करवाते हैं तो श्री कृष्ण इंद्र पूजा पर सवाल उठते हैं और उन्हें भगवान मानने से मना कर देते हैं। श्री कृष्ण इंद्र पूजा की जगह गौ माता की पूजा और गिरी राज गोवर्धन की पूजा करने की सलाह देते हैं जिसे सभी मान लेते हैं। गोवर्धन गिरी की और गौ माता की पूजा हवन शुरू किया जाता है। गोवर्धन पर्वत गोकुल वसियों से प्रसन्न हो उन्हें दर्शन देते हैं और उनसे भेंट स्वीकार करते हैं। जब इंद्र को ये सूचना मिलती है की पृथ्वी वसियों ने इंद्र की पूजा करना बंद कर दिया है और उनकी जगह गौ माता और गोवर्धन की पूजा हुई है तो इंद्र क्रोधित हो उठता है और प्रलय करने वाले सावर्तक को गोकुल वसियों पर प्रलय करने के लिए भेजते हैं और ख़ुद भी जाते हैं। इंद्र देव पृथ्वी वसियों से रुष्ट होकर गोकुल के लोगों पर प्रलय कारण के लिए अपने साथ सावर्तक को लेकर गोकुल पहुँच जाते हैं। गोकुल में इंद्र द्वारा लाई प्रलय के बाद सभी लोगों को लेकर श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत की और बढ़ चलते हैं जहां श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उँगली पर उठा लेते हैं और सभी गोकुल वासी उस पर्वत के नीचे शरण ले लेते हैं। श्री कृष्ण के इस कार्य को देख सभी बहुत खुश होते हैं और श्री कृष्ण की जय जयकार करते हैं। इंद्र देव अपनी पूरी ताक़त लगाकर थक जाता है और श्री कृष्ण शरण में चला जाता है और क्षमा माँगता है जिस पर श्री कृष्ण उन्हें माफ़ कर देते हैं और इंद्र श्री कृष्ण की पूजा आरती करता है। श्रीकृष्णा, रामानंद सागर द्वारा निर्देशित एक भारतीय टेलीविजन धारावाहिक है। मूल रूप से इस श्रृंखला का दूरदर्शन पर साप्ताहिक प्रसारण किया जाता था। यह धारावाहिक कृष्ण के जीवन से सम्बंधित कहानियों पर आधारित है। गर्ग संहिता , पद्म पुराण , ब्रह्मवैवर्त पुराण अग्नि पुराण, हरिवंश पुराण , महाभारत , भागवत पुराण , भगवद्गीता आदि पर बना धारावाहिक है सीरियल की पटकथा, स्क्रिप्ट एवं काव्य में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉ विष्णु विराट जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसे सर्वप्रथम दूरदर्शन के मेट्रो चैनल पर प्रसारित 1993 को किया गया था जो 1996 तक चला, 221 एपिसोड का यह धारावाहिक बाद में दूरदर्शन के डीडी नेशनल पर टेलीकास्ट हुआ, रामायण व महाभारत के बाद इसने टी आर पी के मामले में इसने दोनों धारावाहिकों को पीछे छोड़ दिया था,इसका पुनः जनता की मांग पर प्रसारण कोरोना महामारी 2020 में लॉकडाउन के दौरान रामायण श्रृंखला समाप्त होने के बाद ०३ मई से डीडी नेशनल पर किया जा रहा है, TRP के मामले में २१ वें हफ्ते तक यह सीरियल नम्बर १ पर कायम रहा। In association with Divo - our YouTube Partner #shreekrishna #shreekrishnamahina #krishna #krishnamahima"