Delhi के बढ़ते Air Pollution पर बोले दिल्ली के बच्चे ! दिल्ली का हुआ बुरा हाल

Delhi के बढ़ते Air Pollution पर बोले दिल्ली के बच्चे ! दिल्ली का हुआ बुरा हाल

प्रदूषण से परेशान दिल्ली वालों के सामने यूनिसेफ ने एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट हाजिर कर दी है. इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि प्रदूषण किस तरह उनके बच्चों के दिमागी विकास को रोक देता है. यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषण के सुक्ष्म कणों का सबसे ज्यादा असर 1 से 5 साल के बच्चों पर होता है. वायु प्रदूषण इस उम्र के बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों को प्रभावित करता है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दिल्ली में रहने वाला हर मां-बाप परेशान हैं. लोगों को यह डर सता रहा है की आख‍िर अपने बच्चों को प्रदूषण से कैसे बचाया जा जाए. दिल्ली में रहने वाले लोगों का कहना है कि ‘अगर बच्चों को बचाना है तो दिल्ली से अब कहीं दूर जाना होगा.’ दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कई गुना बड़ गया है. लेकिन अब सवाल सिर्फ प्रदूषण के लेवल यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोग अब डर के साये में जि‍ंदगी गुजार रहे हैं. पेरेंट्स का कहना है कि बहुत डर लगता है, पता नहीं कैसे बच्चों को स्कूल भेजें. लगता है कि अब दिल्ली से बाहर जाना होगा. बच्चों का कहना है कि सांस लेने में दिक्कत होती है. मास्क भी कब तक लगाएं. दिनभर तो मास्क नहीं लगा सकते. कुछ अभ‍िभावकों का कहना है कि पहले दिल्ली में बढ़ रहे अपराध के मामलों से डर लगता था, लेकिन अब प्रदूषण का डर भी सताने लगा है. चार साल के बच्चों को नहीं पता प्रदूषण क्या होता है? दिल्ली एक गैस चेम्बर बन चुकी है. यहां लोगों का दम घुटने लगा है. मयूर विहार में रहने वाली पूजा की 4 साल की बेटी है. उनका कहना है कि हां हमें बहुत डर लगता है. प्रदूषण से अब वाकई बहुत परेशानी होने लगी है. बच्चों को तो समझ भी नहीं. ये चार साल की है, इसे क्या पता. कुछ सवाल हमारी आजतक की टीम ने भी पूछे. जैसे कि प्रदूषण क्या होता है ? आपको पता बच्चों का आईक्यू लेवल कम हो सकता है. यदि वायु प्रदूषण कम करने के लिए निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली में हमने पिछले सप्ताह जो घटनाएं देखीं, वे बहुत तेजी से आम हो सकती हैं.’दीपावली के बाद पिछले हफ्ते दिल्ली में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर वायु प्रदूषण देखा गया. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि राजधानी में 17 साल में अब तक की सर्वाधिक धुंध रही, जिसके कारण शहर में 5000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा, ताकि वायु प्रदूषण के कारण बच्चों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. इसी वजह से 44 लाख 10 हजार बच्चे तीन दिन तक स्कूल नहीं जा पाए. एजेंसी ने सतर्क करते हुए कहा कि निमोनिया के कारण हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब 10 लाख बच्चों की मौत हो जाती है और इनमें से करीब आधे मामले सीधे वायु प्रदूषण से जुड़े हैं. दिल्ली में अब लोग सिर्फ मजबूरी में रोजगार की खातिर जिंदगी गुजार रहे हैं. सभी का कहना है कि अब सरकार को ही बच्चों का आईक्यू लेवल कम हो सकता है. यदि वायु प्रदूषण कम करने के लिए निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली में हमने पिछले सप्ताह जो घटनाएं देखीं, वे बहुत तेजी से आम हो सकती हैं.’दीपावली के बाद पिछले हफ्ते दिल्ली में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर वायु प्रदूषण देखा गया. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि राजधानी में 17 साल में अब तक की सर्वाधिक धुंध रही, जिसके कारण शहर में 5000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा, ताकि वायु प्रदूषण के कारण बच्चों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. इसी वजह से 44 लाख 10 हजार बच्चे तीन दिन तक स्कूल नहीं जा पाए. एजेंसी ने सतर्क करते हुए कहा कि निमोनिया के कारण हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब 10 लाख बच्चों की मौत हो जाती है और इनमें से करीब आधे मामले सीधे वायु प्रदूषण से जुड़े हैं. दिल्ली में अब लोग सिर्फ मजबूरी में रोजगार की खातिर जिंदगी गुजार रहे हैं. सभी का कहना है कि अब सरकार को ही बच्चों का आईक्यू लेवल कम हो सकता है. यदि वायु प्रदूषण कम करने के लिए निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली में हमने पिछले सप्ताह जो घटनाएं देखीं, वे बहुत तेजी से आम हो सकती हैं.’दीपावली के बाद पिछले हफ्ते दिल्ली में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर वायु प्रदूषण देखा गया. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि राजधानी में 17 साल में अब तक की सर्वाधिक धुंध रही, जिसके कारण शहर में 5000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा, ताकि वायु प्रदूषण के कारण बच्चों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. इसी वजह से 44 लाख 10 हजार बच्चे तीन दिन तक स्कूल नहीं जा पाए. एजेंसी ने सतर्क करते हुए कहा कि निमोनिया के कारण हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब 10 लाख बच्चों की मौत हो जाती है और इनमें से करीब आधे मामले सीधे वायु प्रदूषण से जुड़े हैं. दिल्ली में अब लोग सिर्फ मजबूरी में रोजगार की खातिर जिंदगी गुजार रहे हैं. सभी का कहना है कि अब सरकार को ही बच्चों का आईक्यू लेवल कम हो सकता है. यदि वायु प्रदूषण कम करने के लिए निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली में हमने पिछले सप्ताह जो घटनाएं देखीं, वे बहुत तेजी से आम हो सकती हैं.’दीपावली के बाद पिछले हफ्ते दिल्ली में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर वायु प्रदूषण देखा गया. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि राजधानी में 17 साल में अब तक की सर्वाधिक धुंध रही, जिसके कारण शहर में 5000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा, ताकि वायु प्रदूषण के कारण बच्चों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. इसी वजह से 44 लाख 10 हजार बच्चे तीन दिन तक स्कूल नहीं जा पाए. एजेंसी ने सतर्क करते हुए कहा कि निमोनिया के कारण हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब 10 लाख बच्चों की मौत हो जाती है और इनमें से करीब आधे मामले सीधे वायु प्रदूषण से जुड़े हैं. दिल्ली में अब लोग सिर्फ मजबूरी में रोजगार की खातिर जिंदगी गुजार रहे हैं. सभी का कहना है कि अब सरकार को ही