KALI MATA MANDIR / हरिद्वार के दक्षिण काली मंदिर की कहानी, जानिए क्या है अंग्रेज भी हुए थे नतमस्तक

KALI MATA MANDIR / हरिद्वार के दक्षिण काली मंदिर की कहानी, जानिए क्या है अंग्रेज भी हुए थे नतमस्तक

हरिद्वार. हरिद्वार से देहरादून तक रेलवे मार्ग ब्रिटिश शासन में ही बनाया गया था. अंग्रेजों ने पहाड़ियों को तोड़कर रेलवे मार्ग बनाया था. सिद्धपीठ मां काली मंदिर हरिद्वार में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जिसके आगे अंग्रेज भी नतमस्तक हो गए थे. 1860 के आसपास में अंग्रेजों द्वारा हरिद्वार से देहरादून तक रेलवे मार्ग का निर्माण कराया गया था. पहाड़ों को तोड़कर रेलवे मार्ग बनाया गया था. हरिद्वार से देहरादून जाते वक्त दो गुफाएं पड़ती हैं, जो इस बात का उदाहरण हैं कि पहाड़ों के नीचे से रेलवे मार्ग बनाया गया है. उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी से महज 200 से 250 मीटर दूर सिद्धपीठ मां काली का प्राचीन मंदिर स्थित है. मान्यता है कि यह मंदिर कई हजार साल पुराना है. ब्रिटिशकाल में अंग्रेजों द्वारा जब पहाड़ियां तोड़कर रेलवे मार्ग बनाया जा रहा था, तो इस जगह कई ऐसी घटनाएं घटी, जो काफी चौंकाने वाली थीं. कभी गाड़ी का उसी स्थान पर खराब हो जाना, कभी पहाड़ से पत्थर टूटकर नीचे गिर जाना या फिर कोई अन्य वजह होना. इन घटनाओं से अंग्रेज भी परेशान हो चुके थे. बताया जाता है कि उस समय एक अंग्रेज को मां काली ने सपने में अपने स्थान के बारे में बताया था. जब अंग्रेजों द्वारा इस स्थान पर थोड़ा खोदा गया, तो गुफा में मां काली का मंदिर था जिसे देखकर अंग्रेज भी नतमस्तक हो गए थे. जिसके बाद अंग्रेजों ने मंदिर तक जाने के लिए मार्ग बनाया. इसके बाद वहां कोई भी ऐसी घटना नहीं हुई.